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विधायक फकीर राम के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान, अंदरुनी सर्वे में अभी डी श्रेणी नारायण राम के आड़े आ रही है उम्र, नए चेहरे के साथ पार पाने की रणनीति पर चल रहा है काम

गणेश पाठक
हल्द्वानी: किसी दौर में मशहूर बेरीनाग की चाय की चुस्की सात संमदर पार ब्रिटिश शासक लिया करते थे। धीरे-धीरे बेरीनाग एक खूबसूरत शहर के तौर पर विकसित हुआ और अब एक सुदंर पर्यटन गंतव्य भी बन गया है। ठीक इसी तरह कालिका मांता की स्थलीय गंगोलीहाट शहर एवं गांव की तस्वीर बदली दिखती है तो गणाई गंगोली एवं कोटगाड़ी मंदिर का इलाका अभी भी पुरानी यादों को ताजा करता है। यद्यपि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने में अभी करीब सात माह का समय बचा है, लेकिन गंगोलीहाट विधानसभा में स्टारवार चल रहा है। यहां विधायक फकीर राम से पार्टी के ही लोग नाराज चल रहे हैं तो पूर्व विधायक नारावरण राम के आड़े उम्र बाधक बन रही है। एक पूर्व महिला विधायक मीना गंगोला भी अपनी जमीन नहीं बचा पायी हैं। अब अविभाजित यूपी में निर्विरोध जिला पंचायत सदस्य डा. भीमकुमार सक्रियता से सभी दावेदार पशोपेश में हैं। भाजपा के आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में अभी यह सीट डी श्रेणी में है। यानि कठिनाई से जीतने योग्य सीट बनी है।
धार्मिक एवं प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर यह इलाका अभी भी काफी पिछड़ा है। लोग पूर्व कांग्रेस विधायक नारायण राम को विकास पुरुष की तरह से देखते हैं। कांग्रेस कार्यकाल यानि 2002 से 2007 तक पंडित नारायण दत्त तिवारी के दौर में इस इलाके का काफी विकास हुआ। तहसीलों के गठन से लेकर आईटीआई, डिग्री कालेज समेत पेयजल की समस्या के समाधान के लिए तब नारायण राम के काफी काम करवाए। राज्य गठन के बाद पहले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी नारायण राम आर्या को 8 हजार 898 एवं भाजपा प्रत्याशी जोगा राम टम्टा को 8 हजार 428 वोट मिले। अगले विस चुनाव 2007 में भाजपा प्रत्याशी जोगा राम के हाथों नारायण राम पराजित हो गए। नारायण राम को 11 हजार 965 एवं जोगा राम को 14 हजार 765 वोट मिले। विधायक जोगा राम के खिलाफ जनविरोधी लहर को देखकर भाजपा ने 2012 में गीता ठाकुर को चुनाव मैदान में उतार दिया। इसके वाबजूद गीता ठाकुर पराजित हो गई। इस बार नारायण राम को 24 हजार 648 एवं गीता ठाकुर को 16 हजार 786 वोट मिले। अगले विस चुनाव यानि 2017 में भीम कुमार एवं मीना गंगोला की दावेदारी में भाजपा रणनीतिकारों ने मीना को टिकट दिया और कांटे के मुकाबले में नारायण राम हार गए। मीना को 19 हजार 960 और नारायण राम आर्या को 19 हजार 289 वोट मिले। अपने कार्यकाल में मीना भी जनअपेक्षाओं में खरी नहीं उतर पायी और 2022 के विस चुनाव में भाजपा ने फकीर राम को टिकट थमा दिया। कांग्रेस के खिलाफ पनप रहा अंसतोष मतदान में दिखा और फकीर ने 32 हजार 296 वोट हासिल कर लिए। इस बार कांग्रेस ने खजान गुड्डू को टिकट दिया था। इससे पहले विस चुनाव में खजान गुड्डू निर्दलीय लड़े थे। इस बार कांग्रेस प्रत्याशी खजान गुड्डू 22 हजार 243 वोट पर सिमट गए। इस चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज नारायण राम ने भाजपा का दामन थाम लिया जो अभी दायित्वधारी हैं। इसके बावजूद टिकट के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन गंगोलीहाट विधानसभा की भौगोलिक परिस्थितिया उनके स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं हैं। उनके समर्थक जरुर चुनाव लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे मन से चुनाव लड़ना नहीं चाहते हैं। इस कारण भाजपा नए चेहरे के साथ चुनाव मैदान में जा सकती है। इसमें डा. भीमकुमार, करन राम, दर्पण कुमार, सुरेंद्र कुमार समेत करीब दस लोगों के नाम के पोस्टर पूरी विधानसभा में दिख रहे हैं। सभी उम्मीदवार टिकट पाने के लिए हर तरह का दांव खेल रहे हैं। पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि नए चेहरे को उतार कर इस जन विरोधी रुझान जीत में बदलना चाहते हैं। ऐसे में सभी समीकरणों में डा. भीमकुमार अन्य दावेदारों से फिट बैठ रहे हैं। हाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में डा. भीमकुमार अपनी नई नवेली बहू को बेरीनाग ब्लाक प्रमुख बनाने में सफल रहे हैं। अभी गंगोलीहाट के ब्लाक प्रमुख विनोद प्रसाद निर्दलीय हैं। गंगोलीहाट विस पिथौरागढ़, चम्पावत, जागेश्वर, कपकोट, डीडीहाट विधान सभा की सीमाओं से जुड़ी हुई है।

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