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नैनीताल हाईवे पर सुबह से ही सड़क किनारे एक दुकान के बाहर गाड़ियों की कतार लगनी शुरू हो जाती है। कोई हल्द्वानी से आया है, कोई नैनीताल से लौट रहा है। कुछ लोग तो सिर्फ एक प्लेट मटन-चावल खाने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करते हैं। दुकान के भीतर बड़े भगौनों से उठती भाप और बाहर इंतजार करते ग्राहकों की भीड़ इस बात का सबूत देती है कि यहां कारोबार भी गर्म है और चर्चा भी।
लेकिन इस बार चर्चा स्वाद की नहीं, जीएसटी की है। जिस दुकान की पहचान उसके मटन-चावल से बनी, उसी दुकान पर अब राज्य कर विभाग की नजर टिक गई है। वजह बनी सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो। कहते हैं कि आजकल कोई भी चीज सिर्फ ग्राहकों तक नहीं पहुंचती, सीधे सरकारी दफ्तरों तक भी पहुंच जाती है। कुछ दिन पहले एक ब्लॉगर ने इस प्रसिद्ध दुकान का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला। वीडियो में दावा किया गया कि यहां एक दिन में तीन से चार बकरों का मांस चावल के साथ बिक जाता है। वीडियो देखते ही देखते हजारों लोगों तक पहुंच गया। जहां दर्शकों को स्वाद की कहानी दिखाई दे रही थी, वहीं राज्य कर विभाग को कारोबार का आकार दिखाई देने लगा। वायरल वीडियो ने वह काम कर दिया जो शायद किसी शिकायत या सर्वेक्षण से भी नहीं हुआ था। दुकान की लोकप्रियता अब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने लगी। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के बाद राज्य कर विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। असिस्टेंट कमिश्नर प्रकाश त्रिवेदी के नेतृत्व में टीम नयना गांव पहुंची। जांच हुई। बिक्री के पैटर्न देखे गए। कारोबार का अनुमान लगाया गया।
विभाग का दावा है कि दुकान का वार्षिक टर्नओवर 50 लाख रुपये से अधिक है। जबकि इतनी आय होने पर जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य हो जाता है। मगर जांच में पता चला कि दुकान का अब तक जीएसटी पंजीकरण नहीं कराया गया है। यह वही सवाल है जो अब विभाग पूछ रहा है। हाईवे किनारे दिखने वाली यह साधारण-सी दुकान लंबे समय से लोगों की पसंद बनी हुई है। कई पर्यटक तो इसे अपनी यात्रा का स्थायी पड़ाव मानते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह से शाम तक यहां बैठने तक की जगह मिलना मुश्किल हो जाता है। मटन खत्म होने से पहले पहुंच जाना भी कई ग्राहकों की रणनीति का हिस्सा होता है। यानी लोकप्रियता कोई नई बात नहीं थी। नया सिर्फ यह है कि अब उसकी चर्चा सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच गई है। राज्य कर विभाग ने दुकान स्वामी चंदन सिंह को 12 जून तक जीएसटी पंजीकरण कराने का समय दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मटन-चावल की बिक्री पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू होता है और यदि निर्धारित समय तक पंजीकरण नहीं कराया गया तो जीएसटी कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि दुकान स्वामी ने विभाग को भरोसा दिया है कि वह जल्द ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है।
क्या आज के दौर में कारोबार की सफलता को छिपाना संभव है? एक समय था जब दुकान की पहचान सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित रहती थी। अब एक मोबाइल फोन, एक रील और कुछ लाख व्यूज़ किसी भी छोटे व्यवसाय को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना सकते हैं। लेकिन इसके साथ एक दूसरा सच भी है सोशल मीडिया सिर्फ ग्राहक ही नहीं लाता, कभी-कभी सरकारी निगाहें भी साथ ले आता है।
नयना गांव की यह कहानी सिर्फ मटन-चावल की नहीं है। यह डिजिटल दौर की कहानी है, जहां एक वायरल वीडियो ने स्वाद के सफर को टैक्स जांच तक पहुंचा दिया। जिस वीडियो का मकसद शायद लोगों को यह बताना था कि यहां का मटन कितना मशहूर है, वही वीडियो अब इस सवाल का कारण बन गया है कि कारोबार कितना बड़ा है। अब देखना यह है कि 12 जून तक जीएसटी पंजीकरण हो जाता है या फिर मटन-चावल की यह चर्चित दुकान विभागीय कार्रवाई की अगली खबर बनती है। फिलहाल हाईवे पर मटन-चावल की प्लेटें पहले की तरह बिक रही हैं, लेकिन काउंटर के पीछे अब सिर्फ ग्राहकों की नहीं, जीएसटी की भी नजर है।

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