Advertisement
ख़बर शेयर करें -

दो उड़ानों के सपने से एक उड़ान की हकीकत तक, अब उसमें भी आधी सीटें खाली; सवाल सिर्फ मौसम का है या योजना का भी?

पंतनगर। हवाई अड्डे बनाना आसान है। हवाई सेवा शुरू करना भी आसान है। मुश्किल काम है उन विमानों को यात्रियों से भरना, जिनके लिए पूरी योजना बनाई जाती है।
उत्तराखंड के पंतनगर एयरपोर्ट और नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के बीच एक जुलाई से बड़े उत्साह के साथ शुरू हुई नई हवाई सेवा महज़ पंद्रह दिन के भीतर ही लड़खड़ाने लगी है। शुरुआत में रोज़ाना दो उड़ानों का दावा था, लेकिन यात्रियों की कमी के कारण अब एक उड़ान बंद करनी पड़ी है। बची हुई एकमात्र उड़ान में भी लगभग आधी सीटें खाली जा रही हैं।
यह कहानी सिर्फ एक विमान की नहीं, बल्कि उस उम्मीद की भी है जिसे नई कनेक्टिविटी के नाम पर लोगों के सामने रखा गया था।
नई सेवा शुरू होने पर इंडिगो के 72 सीटर विमान से पंतनगर और जेवर एयरपोर्ट के बीच रोज़ाना दो उड़ानों का शेड्यूल बनाया गया था। इसी व्यवस्था के चलते पंतनगर से दिल्ली के बीच पहले से संचालित दो उड़ानों में से दोपहर वाली सेवा भी बंद कर दी गई।
योजना यह थी कि नोएडा और एनसीआर के यात्रियों को जेवर एयरपोर्ट के माध्यम से बेहतर सुविधा मिलेगी। लेकिन पंद्रह दिन के भीतर ही तस्वीर बदल गई। यात्रियों की संख्या उम्मीद के अनुरूप नहीं रही और दो में से एक उड़ान बंद करनी पड़ी।
अब स्थिति यह है कि पंतनगर से दिल्ली के लिए एक उड़ान और जेवर एयरपोर्ट के लिए एक उड़ान ही संचालित हो रही है।
पंतनगर एयरपोर्ट के निदेशक पवन कुमार के अनुसार, वर्तमान में जेवर जाने वाली उड़ान में 72 सीटों वाले विमान की लगभग आधी सीटें खाली रह रही हैं। उन्होंने बताया कि पंतनगर आने वाले यात्रियों की तुलना में यहां से जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी कम है।
एयरपोर्ट प्रशासन का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह मानसून का मौसम है। मार्च से जून तक पर्यटन और व्यावसायिक यात्राओं के कारण हवाई यात्रा की मांग अधिक रहती है, जबकि जुलाई से सितंबर के बीच बारिश के कारण यात्रियों की संख्या स्वाभाविक रूप से घट जाती है।
यह सवाल इसलिए भी उठता है क्योंकि नई सेवा शुरू करते समय यात्रियों की संभावित संख्या का आकलन किया जाता है। यदि पंद्रह दिन के भीतर ही एक उड़ान बंद करनी पड़ जाए तो यह केवल मौसम का असर है या मांग का अनुमान अपेक्षा से अधिक निकला?
क्या यात्रियों के लिए दिल्ली अभी भी अधिक सुविधाजनक विकल्प है? क्या जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से आगे जाने की व्यवस्था अभी लोगों की यात्रा की आदतों में जगह नहीं बना सकी? या फिर लोगों को इस नई सेवा की जानकारी और उपयोगिता समझाने में समय लगेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में ही स्पष्ट होंगे।
एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि बारिश के बावजूद पंतनगर एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी की कोई बड़ी समस्या नहीं है। दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट के लिए सभी निर्धारित उड़ानें समय पर संचालित हो रही हैं। यानी चुनौती मौसम से अधिक यात्रियों की संख्या की दिखाई दे रही है।
हवाई सेवाओं की सफलता केवल रनवे से नहीं, यात्रियों की संख्या से तय होती है। यदि मानसून के बाद यात्री संख्या बढ़ती है तो यह सेवा फिर गति पकड़ सकती है। लेकिन यदि खाली सीटों का सिलसिला जारी रहा, तो यह नई शुरुआत अपने भविष्य को लेकर फिर सवालों के घेरे में आ सकती है।
फिलहाल पंतनगर से जेवर तक विमान उड़ रहा है, लेकिन उसके साथ एक सवाल भी उड़ रहा है क्या नई हवाई सेवा को यात्रियों का भरोसा मिल पाएगा, या यह उड़ान उम्मीद से पहले ही ऊंचाई खो देगी?

Comments

[gs-fb-comments]