Advertisement
ख़बर शेयर करें -

पिथौरागढ़ में कांग्रेस का सम्मेलन, जहां भाषण से ज्यादा गूंजे विरोध के स्वर

पिथौरागढ़। परिवर्तन का संकल्प लेने के लिए जुटे नेता जब अपने ही मंच पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े दिखाई दें, तो सवाल सिर्फ एक सम्मेलन का नहीं रह जाता, बल्कि पूरे संगठन की दिशा और दशा पर खड़ा हो जाता है। पिथौरागढ़ में कांग्रेस का परिवर्तन संकल्प सम्मेलन राजनीतिक संदेश देने से पहले ही अंदरूनी टकराव का आईना बन गया।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल मंच पर मौजूद थे। सामने कार्यकर्ता बैठे थे। लेकिन चर्चा न संगठन की रही, न सरकार के खिलाफ रणनीति की। मंच पर असहमति इस तरह फूटी कि विधायक मयूख महर अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम बीच में छोड़कर बाहर निकल गए। पीछे रह गईं नारेबाजी, नाराजगी और संगठन की असहज खामोशी।
घटना के तुरंत बाद कांग्रेस ने सख्ती दिखाते हुए तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा। इतना ही नहीं, पिथौरागढ़ जिला महिला कांग्रेस की पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया। संदेश साफ था अनुशासनहीनता पर कार्रवाई होगी, चाहे मामला मंच पर ही क्यों न हुआ हो।
विवाद की शुरुआत जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष भावना नगरकोटी के संबोधन से हुई। उन्होंने नगर निकाय चुनाव और संगठनात्मक फैसलों को लेकर स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठाए। इसके बाद माहौल तेजी से बिगड़ा और विधायक मयूख महर नाराज होकर समर्थकों के साथ बाहर चले गए। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी शुरू कर दी।
प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने इसे अनुशासनहीनता बताते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी नेतृत्व ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ने भी जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने की पुष्टि की है। प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि अनुशासन समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
राजनीति में विरोध होना असामान्य नहीं है, लेकिन जब विरोध सार्वजनिक मंच पर संगठन की मर्यादा को पीछे छोड़ दे, तब विपक्ष को हमला करने का अवसर मिल जाता है। यही हुआ। विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की गुटबाजी और अंतर्कलह का प्रमाण बताना शुरू कर दिया। कांग्रेस का पक्ष है कि यह अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई है, लेकिन सवाल यह भी है कि अगर असंतोष इतना गहरा था तो वह मंच तक पहुंचा कैसे?
परिवर्तन संकल्प सम्मेलन अब अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि उस दृश्य के लिए याद किया जा रहा है जिसमें पार्टी का मंच ही पार्टी के भीतर के संघर्ष का मंच बन गया। जब संगठन के भीतर संवाद कमजोर पड़ता है, तब भाषणों से ज्यादा असर नाराजगी की तस्वीरें छोड़ जाती हैं।

Comments