
युवाओं को सुधरने की नसीहत, पहले भर्ती तंत्र सुधरे, Gen-Z आंदोलन पर भी साधा निशाना
हरिद्वार। स्वतंत्रता दिवस पर पतंजलि योगपीठ में ध्वजारोहण के बाद बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्तियों और Gen-Z आंदोलन को लेकर तीखे बयान दिए। उन्होंने झारखंड में छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि देश के छोटे स्कूल-कॉलेजों में शिक्षक, किताब, बिजली, पानी और शौचालय तक की मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। दूसरी ओर जहां सुविधाएं हैं, वहां नकल और पेपर लीक जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
सबसे गंभीर बात रामदेव ने सरकारी नौकरियों को लेकर कही। उन्होंने दावा किया कि खासकर इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है और जाति, वर्ग, समुदाय व विचारधारा के आधार पर लोगों को नौकरी देने की कोशिश होती है। यदि यह दावा सही है तो सवाल सिर्फ भर्ती का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता का है जिसमें लाखों युवा वर्षों की मेहनत के बाद भी अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
रामदेव ने कहा कि देश में घपला बहुत है और समय रहते इसे ठीक कर लेना चाहिए, वरना और आंदोलन हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अराजकता का समर्थन नहीं करते। लेकिन सवाल यह है कि युवाओं को सुधरने की नसीहत देने से पहले भर्ती व्यवस्था कब सुधरेगी?
Gen-Z आंदोलन में शामिल युवक-युवतियों पर भी रामदेव ने तंज कसा। मगर आंदोलन को केवल हंगामा बताकर खारिज करने के बजाय उसके पीछे के सवालों का जवाब देना जरूरी है। पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती में पारदर्शिता जैसे सवाल अगर लगातार अनुत्तरित रहेंगे तो गुस्सा सड़क पर आएगा ही।
रामदेव ने संसद के सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती कटुता पर भी चिंता जताई और कहा कि राजनीतिक व जातीय नफरत देश के लिए घातक है। उनका यह बयान एक बड़ा सवाल छोड़ गया कि लोकतंत्र में युवाओं से संयम की उम्मीद है तो सत्ता और संस्थाओं से जवाबदेही की उम्मीद क्यों नहीं?
व्यवस्था अगर सचमुच पाक-साफ है तो जांच से डर कैसा, और अगर गड़बड़ी है तो सुधार में देर कैसी?
