Advertisement
ख़बर शेयर करें -

खटीमा। वक्फ संपत्ति, लाखों की कथित आमदनी दुकानों के हस्तांतरण के आरोप और अब जान से मारने की साजिश का दावा। खटीमा में वक्फ संख्या 137 और 138, जामा मस्जिद और मदरसा रहमानिया की संपत्तियों को लेकर विवाद अब इतना गहरा गया है कि मामला सीधे प्रशासन की चौखट तक पहुंच चुका है।
एक तरफ सवाल है वक्फ की संपत्ति से हर महीने आने वाले कथित डेढ़ लाख रुपये का हिसाब कहां है? दूसरी तरफ आरोप है क्या हिसाब मांगने की आड़ में किसी को निशाना बनाया जा रहा है? और तीसरी तरफ सबसे बड़ा सवाल आखिर इन संपत्तियों का असली हिसाब-किताब कौन देगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। लेकिन दोनों पक्षों के आरोपों ने खटीमा में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। गौटिया निवासी जावेद रज़ा ने एसडीएम खटीमा को दिए ज्ञापन में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि चंदे और दुकानों के किराये से हर महीने करीब 1.50 लाख रुपये की आय होती है।
हिसाब लगाएं तो तीन साल में यह रकम करीब 54 लाख रुपये बैठती है। अब शिकायतकर्ता का सीधा सवाल है अगर इतनी आमदनी हुई, तो खर्च कहां हुआ? किस मद में कितना पैसा गया? कौन इसका हिसाब रखता रहा? और सबसे अहम क्या वक्फ की इस कथित आय का पूरा और पारदर्शी रिकॉर्ड मौजूद है? ध्यान रहे, 54 लाख रुपये का आंकड़ा शिकायतकर्ता के अनुमान पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। असली तस्वीर ऑडिट और दस्तावेजों की जांच के बाद ही साफ होगी। पांच दुकानों पर उठे सवाल किसके इशारे पर हुआ हस्तांतरण? विवाद का दूसरा विस्फोटक पहलू वक्फ संपत्ति पर मौजूद दुकानों का कथित हस्तांतरण है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि करीब पांच दुकानों को बिना सार्वजनिक सूचना के दूसरे लोगों को हस्तांतरित किया गया। अगर यह आरोप सही है तो सवाल बेहद गंभीर है कि य़ह दुकानें किस नियम के तहत दी गईं? किसके आदेश से दी गईं?
क्या इसके लिए कोई सार्वजनिक प्रक्रिया अपनाई गई? और क्या वक्फ बोर्ड के नियमों का पालन हुआ? यही वे सवाल हैं जिनका जवाब अब दस्तावेजों से मांगा जाएगा।
उधर आरोपों के घेरे में आए वर्तमान प्रशासक कामिल खान भी चुप नहीं बैठे। उन्होंने एसडीएम को पत्र देकर शिकायतों पर अपना पक्ष रखा और पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ साजिश बताया। कामिल खान का दावा है कि 30 जुलाई 2026 को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा तत्कालीन प्रबंधक कमेटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी। उनके मुताबिक इस कार्रवाई के बाद तत्कालीन कमेटी और कथित वक्फ माफियाओं से जुड़े लोग उनसे नाराज हैं। अब आरोप लगाया जा रहा है कि उनकी सामाजिक छवि खराब करने के लिए उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। कामिल खान ने अपनी जान को खतरा बताते हुए आशंका जताई है कि उनके खिलाफ जानलेवा हमला कराने की साजिश भी हो सकती है। यह बेहद गंभीर आरोप है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। यहां मामला दिलचस्प भी है और गंभीर भी। एक पक्ष कहता है वक्फ की आय का हिसाब दो। दुकानों के हस्तांतरण की जांच करो। तीन साल का विशेष ऑडिट कराओ। दूसरा पक्ष कहता है हमारे खिलाफ साजिश हो रही है। वक्फ माफियाओं की भूमिका की जांच हो। हमारी सामाजिक छवि खराब करने की कोशिश बंद हो। तो फिर सच क्या है? क्या वक्फ संपत्ति की आय में कोई गड़बड़ी हुई? क्या दुकानों का हस्तांतरण नियमों के खिलाफ था? या फिर शिकायतों के पीछे कोई दूसरा विवाद छिपा है? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी आरोप लगाने वाले या आरोप झेलने वाले के बयान से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और जांच से मिलेगा। एसडीएम खटीमा तुषार सैनी के मुताबिक प्रशासन संबंधित आदेशों और दस्तावेजों का अध्ययन कर रहा है। दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा और जांच के बाद तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यानी अब असली परीक्षा होगी रिकॉर्ड की। कितनी आय हुई?कहां खर्च हुई? किसके नाम दुकानें गईं? किस आदेश के आधार पर गईं? पूर्व कमेटी ने क्या फैसले लिए? वर्तमान प्रशासक के कार्यकाल में क्या हुआ? और सबसे बड़ा सवाल क्या वक्फ संपत्ति के नाम पर चल रहे इस पूरे विवाद में कहीं कोई बड़ा खेल छिपा है? फिलहाल यह सवाल है, निष्कर्ष नहीं। लेकिन इतना तय है कि खटीमा की वक्फ संपत्तियों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब साधारण शिकायत नहीं रह गया है। एक तरफ लाखों रुपये की कथित आय का हिसाब है, दूसरी तरफ संपत्ति और दुकानों के प्रबंधन पर सवाल हैं और तीसरी तरफ जान के खतरे जैसे गंभीर आरोप।
क्योंकि इस कहानी में बयान बहुत हैं आरोप बहुत हैं लेकिन जनता को इंतजार है सिर्फ एक चीज का और वो हैं सच का।

Comments

[gs-fb-comments]