
पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव
हल्द्वानी। अस्पताल वह जगह है जहां लोग बीमारी लेकर जाते हैं और उम्मीद लेकर लौटना चाहते हैं। लेकिन कालाढूंगी रोड स्थित ईएनटी हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर में बेरीनाग निवासी मोहन सिंह पाठक के परिजनों के लिए यह उम्मीद अचानक मातम में बदल गई। गले की समस्या का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे मोहन सिंह की बायोप्सी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक बेरीनाग निवासी मोहन सिंह पाठक लंबे समय से गले की समस्या से परेशान थे। सोमवार को परिजन उन्हें उपचार के लिए कालाढूंगी रोड स्थित ईएनटी हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर लेकर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि अस्पताल की ओपीडी में जांच के बाद तैनात चिकित्सक डॉ. जेड. पांडेय ने मरीज को गंभीर बताते हुए गले की बायोप्सी कराने की बात कही।
परिजनों के अनुसार मोहन सिंह को बायोप्सी के लिए अस्पताल के ओटी में ले जाया गया। आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। मरीज की मौत की खबर सामने आते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मरीज की बिगड़ती हालत को संभालने के लिए आवश्यक जीवनरक्षक व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मरीज की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजन डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगने लगे। उनका सवाल सीधा था जिस मरीज को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था, उसकी हालत आखिर बायोप्सी के दौरान इतनी कैसे बिगड़ी कि उसकी जान चली गई?
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
अब इस पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम होगी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि बायोप्सी से पहले मरीज की चिकित्सकीय स्थिति का किस तरह आकलन किया गया, प्रक्रिया के दौरान कौन-कौन सी सावधानियां बरती गईं और आपात स्थिति आने पर अस्पताल में क्या चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध थी।
इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा एक व्यक्ति वापस घर नहीं लौट सका। अब परिजन जवाब चाहते हैं और जांच यह तय करेगी कि यह दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सकीय जटिलता थी या वास्तव में कहीं लापरवाही हुई। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है। अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सक का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
