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ज्योलीकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में जल संस्थान और पेयजल निगम के अफसरों पर कार्रवाई, जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ पर सरकार ने दिखाई सख्ती

देहरादून। पानी साफ नहीं था तो सवाल सिर्फ नलों तक सीमित नहीं था, सवाल था उन अधिकारियों की जिम्मेदारी का, जिनके कंधों पर जनता तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की जिम्मेदारी है। नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में अब सरकार ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर जल संस्थान और पेयजल निगम के छह इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सरकार के मुताबिक, इन अधिकारियों पर अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप हैं। कार्रवाई की जद में जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता तथा पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं।
ज्योलीकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायत सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शीर्ष अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की रिपोर्ट सामने आने के बाद छह इंजीनियरों पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
वहीं नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकार का संदेश साफ है कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही को महज विभागीय चूक मानकर टालने की नीति नहीं चलेगी।
सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर नीट -यूजी 2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसिलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश के मामले में कार्रवाई की गई थी। सरकार के अनुसार, अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और उनकी प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द की गई है।
लगातार दो मामलों में कार्रवाई से सरकार ने प्रशासनिक तंत्र को यह संकेत देने की कोशिश की है कि जिम्मेदारी तय करने में ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस
पूरे मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए जनहित सर्वोपरि है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी जनता के हितों की अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों और शीर्ष अधिकारियों को इस संबंध में लगातार निर्देश दिए जाने की बात भी कही।
अब बड़ा सवाल यह है कि ज्योलीकोट में दूषित पानी की स्थिति बनी कैसे और निगरानी तंत्र ने समय रहते इसे क्यों नहीं रोका? छह इंजीनियरों पर कार्रवाई के बाद जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर भी नजर रहेगी। जनस्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में निलंबन के बाद असली परीक्षा अब यह होगी कि जिम्मेदारी और लापरवाही की पूरी तस्वीर जांच में कितनी स्पष्ट होती है।

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