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रेट्रो फोटो का शौक कहीं चेहरा न कर दे सार्वजनिक

हल्द्वानी। आप फेसबुक खोलते हैं। सामने दोस्त की तस्वीर है। बाल बिल्कुल 80 के दशक वाले। कपड़े पुराने जमाने के। चेहरे पर रेट्रो अंदाज। नीचे लिखा है कैसा लग रहा हूं? आप कहते हैं वाह! बिल्कुल पुराने हीरो लग रहे हो।
दोस्त खुश। आप खुश। एआई भी खुश। लेकिन इस पूरी खुशी में एक सवाल कहीं पीछे छूट गया यह तस्वीर जिस एआई ऐप को दी गई, उसके पास अब आपके चेहरे का डेटा भी है या नहीं?
यही वह सवाल है, जिस पर साइबर विशेषज्ञ लोगों को सावधान कर रहे हैं। एआई ने चंद सेकंड में आपको 80 के दशक में पहुंचा दिया। न पुरानी अलमारी खोजनी पड़ी, न नाई के पास जाकर वैसा हेयरकट करवाना पड़ा। मोबाइल खोला, फोटो अपलोड की और कुछ सेकंड बाद 1980 का जमाना आपके मोबाइल में वापस। मगर तकनीक की इस सुविधा का दूसरा पहलू भी है। हम मनोरंजन के लिए अपना चेहरा दे रहे हैं। सवाल यह है कि बदले में हमें सिर्फ एक रेट्रो फोटो मिल रही है या हमारी डिजिटल पहचान भी कहीं जमा हो रही है?
सोशल मीडिया पर आपका नाम पहले से मौजूद है। मोबाइल नंबर कहीं न कहीं जुड़ा है। पुरानी तस्वीरें मौजूद हैं। दोस्तों और रिश्तेदारों की जानकारी मौजूद है। अब इसमें चेहरे की डिजिटल जानकारी भी जुड़ जाए तो अपराधियों के लिए किसी व्यक्ति की पहचान और भरोसे का फायदा उठाना आसान हो सकता है। यानी कल तक साइबर अपराधी आपकी आवाज की नकल करने की कोशिश कर रहे थे, अब आपके चेहरे की नकल भी संभव है। और यही इस ट्रेंड का सबसे गंभीर हिस्सा है।
एक फोटो, कई खतरे
आपकी तस्वीर का गलत इस्तेमाल करके आपके नाम और चेहरे से नकली सोशल मीडिया अकाउंट बनाया जा सकता है।
आपके चेहरे को किसी दूसरे वीडियो पर लगाकर भ्रामक या आपत्तिजनक वीडियो बनाया जा सकता है। आपकी आवाज और चेहरे की नकल करके कोई रिश्तेदार या परिचित बनकर पैसे मांग सकता है। एआई से तस्वीर में बदलाव करके धमकाने या ब्लैकमेल करने की कोशिश हो सकती है। आपकी सार्वजनिक जानकारी और फोटो को जोड़कर डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा सकती है। आपके चेहरे को किसी उत्पाद, बयान या गतिविधि से जोड़कर झूठी सामग्री तैयार की जा सकती है। पहचान से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।
बता दें कि फरवरी 2025 में फ्रांस में एक प्रतिष्ठित मोबाइल कंपनी के वॉइस असिस्टेंट को लेकर शिकायत और जांच की खबर सामने आई थी। आरोप था कि रिकॉर्ड हुई कुछ बातचीत में यूजर्स की निजी जानकारी शामिल थी। कंपनी ने आरोपों से इनकार किया था। अक्टूबर 2025 में पेरिस अभियोजक कार्यालय में डेटा हैंडलिंग को लेकर जांच शुरू होने की खबर भी सामने आई। इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल उठाया तकनीक हमारी सुविधा के लिए है या हमारी निजी जानकारी भी उसकी कीमत का हिस्सा बन रही है? और अब वही सवाल चेहरे को लेकर सामने है।
रेट्रो फोटो बनवाना कोई अपराध नहीं है। पुराने जमाने का लुक पसंद करना भी कोई खतरा नहीं है। खतरा तब पैदा होता है जब हम बिना जाने किसी अनजान एआई ऐप को अपनी तस्वीर, चेहरा और निजी जानकारी सौंप देते हैं। फोटो अपलोड करने से पहले देखिए कि ऐप कौन चलाता है। उसकी प्राइवेसी पॉलिसी क्या कहती है। तस्वीर कितने समय तक रखी जाती है। उसका इस्तेमाल एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है या नहीं। और सबसे जरूरी क्या आप अपनी फोटो बाद में वहां से पूरी तरह हटा सकते हैं? लेकिन अगर आपका चेहरा किसी अनजान डिजिटल सर्वर पर चला गया, तो वहां से वापस आना शायद इतना आसान न हो। इसलिए अगली बार जब एआई आपको 1980 का हीरो या हिरोइन बनाए, तो तस्वीर सेव करने से पहले एक बार यह जरूर सोचिए रेट्रो लुक तो पुराना है, लेकिन इसका डिजिटल जोखिम बिल्कुल नया है।

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