Advertisement
ख़बर शेयर करें -

दयारा बुग्याल का सन्नाटा: 12 हजार फीट की ऊंचाई पर लापता बबीता पांडे और सवालों में डूबा पहाड़, जहां बर्फ और बादलों के बीच सवाल गूंजते हैं

देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल, जिसे उसकी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और शांत विस्तृत चरागाहों के लिए जाना जाता है, इन दिनों एक अलग ही कहानी लिख रहा है। यह कहानी फूलों, बर्फ और ट्रेकिंग के रोमांच की नहीं है, बल्कि एक ऐसी गुमशुदगी की है जिसने पूरे प्रदेश को बेचैन कर दिया है।
24 वर्षीय बबीता पांडे पिछले एक सप्ताह से लापता हैं। और उनके साथ लापता है एक सीधा-सादा सवाल आखिर वो गई कहां? जानकारी के मुताबिक, बबीता अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थीं। हर्षिल और गंगोत्री क्षेत्र का भ्रमण करने के बाद वे दयारा बुग्याल पहुंचे और गोई कैंप में ठहरे।
29 मई की रात करीब 11 बजे बबीता टेंट से बाहर निकलीं। बताया जाता है कि वह उस समय मोबाइल पर गाने सुन रही थीं। इसके बाद क्या हुआ इस सवाल का जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है।
सुबह जब साथी जागे, तो बबीता वहां नहीं थीं। पहले खुद तलाश की गई, फिर प्रशासन को सूचना दी गई। और उसके बाद शुरू हुआ वह खोज अभियान, जो अब तक जारी है।
दयारा बुग्याल की ऊंचाई लगभग 12 हजार फीट है। यहां घने जंगल भी हैं, गहरी खाइयां भी और बर्फीले-फिसलन भरे रास्ते भी। रेस्क्यू अभियान में आईटीबीपी, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार जुटी हुई हैं।
ड्रोन उड़ाए गए, खोजी कुत्ते लगाए गए, संभावित जल स्रोतों की भी जांच की गई। हर उस जगह को खंगाला गया जहां किसी के फंसने की संभावना हो सकती है।
लेकिन हर दिन के साथ एक ही बात दोहराई जा रही है कोई सुराग नहीं मिला। सुबह होते ही टीमें पहाड़ों में निकलती हैं। शाम ढलते-ढलते वे लौट आती हैं। रिपोर्ट वही रहती है अब तक कोई ठोस संकेत नहीं मिला।
पहाड़ों की खामोशी अब सिर्फ प्राकृतिक नहीं लगती, वह जैसे किसी सवाल को अपने भीतर दबाए बैठी हो।
बबीता का परिवार रामनगर (नैनीताल) से उत्तरकाशी के बीच लगातार भटक रहा है। कभी रैथल गांव, कभी ट्रेक रूट, कभी बेस कैंप। मां की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। हर फोन की घंटी एक उम्मीद लेकर आती है शायद इस बार आवाज बबीता की हो। उनके चचेरे भाई पंकज पांडे कहते हैं बबीता कोई अनट्रेंड ट्रेकर नहीं थी। उसे ट्रेकिंग का अनुभव था। हमें यकीन नहीं हो रहा कि वो इस तरह गायब हो सकती है।
और फिर वह एक वाक्य जो इस पूरे मामले को इंसानी बना देता है अगर वह कहीं है और यह सुन रही है, तो बस घर फोन कर दे। इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब परिजनों ने बबीता के साथ गए दो युवकों हरमनपाल और हरमनप्रीत सिंह पर अपहरण का आरोप लगाया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि बबीता और हरमनपाल पहले से परिचित थे और तीनों साथ ट्रेक पर आए थे। लेकिन सवाल वही है अगर यह केवल ट्रेकिंग थी, तो बबीता कहां गई? पुलिस और प्रशासन किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रहे रास्ता भटकना, किसी गहरी खाई में गिरना, जंगली जानवर का हमला, या किसी आपराधिक घटना की संभावना, लेकिन अभी तक किसी भी थ्योरी को साबित करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। दयारा बुग्याल अब सिर्फ एक ट्रेकिंग डेस्टिनेशन नहीं रह गया है। यह एक सवाल बन गया है जो हर खोजी टीम, हर परिजन और हर रिपोर्ट के साथ और गहरा होता जा रहा है। सवाल सरल है, लेकिन जवाब नहीं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। टीमें डटी हुई हैं। उम्मीदें भी कायम हैं। लेकिन पहाड़ों के बीच एक खाली जगह है, जो हर दिन और बड़ी होती जा रही है। और इस पूरे मामले में सबसे भारी चीज अगर कुछ है, तो वह है अनिश्चितता। क्योंकि दयारा बुग्याल अभी भी जवाब नहीं दे रहा।

Comments