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एक छोटे शहर का बड़ा सपना अब श्रीलंका की धरती पर खेलेगा

हल्द्वानी की सुबह आज कुछ अलग है। पहाड़ों से उतरती हवा में एक नई खुशी घुली हुई है। शहर के क्रिकेट मैदानों में गेंद और बल्ले की आवाज़ों के बीच एक नाम बार-बार सुनाई दे रहा है लक्ष्य रायचंदानी। यह सिर्फ एक युवा क्रिकेटर के चयन की खबर नहीं है। यह उस सपने की कहानी है जो उत्तराखंड के एक छोटे शहर के मैदान से शुरू हुआ और अब भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के उपकप्तान के रूप में श्रीलंका दौरे तक पहुंच गया है। जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने श्रीलंका दौरे के लिए अंडर-19 टीम की घोषणा की और उसमें लक्ष्य रायचंदानी का नाम उपकप्तान के रूप में सामने आया, तो हल्द्वानी स्थित जीएनजी क्रिकेट एरिना में खुशी की लहर दौड़ गई। खिलाड़ियों के चेहरों पर मुस्कान थी, कोचों की आंखों में गर्व था और क्रिकेट प्रेमियों को लगा मानो उनके अपने घर का बेटा देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहा हो। कहते हैं कि हर बड़ी उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत छिपी होती है। लक्ष्य की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। महज आठ वर्ष की उम्र में उन्होंने बल्ला हाथ में उठाया था। शायद तब उन्हें भी नहीं पता होगा कि एक दिन भारतीय टीम की जर्सी पहनने का सपना सच हो जाएगा। पिछले पांच वर्षों से वह हल्द्वानी में रहकर जीएनजी क्रिकेट एरिना में कोच अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में लगातार अभ्यास कर रहे हैं।
सुबह की कड़ी ट्रेनिंग, गर्मी-सर्दी की परवाह किए बिना नेट्स में घंटों पसीना बहाना और हर मैच में खुद को बेहतर साबित करने की जिद यही उनकी पहचान बन गई। कोच अभिषेक कुमार कहते हैं कि लक्ष्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रतिभा नहीं, बल्कि उसका अनुशासन है। प्रतिभा बहुत खिलाड़ियों के पास होती है, लेकिन उसे निरंतर मेहनत से निखारना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इस वर्ष लक्ष्य ने उत्तराखंड रणजी टीम के लिए पदार्पण किया और बहुत कम समय में अपनी पहचान बना ली। चार रणजी मुकाबलों में तीन अर्धशतक लगाकर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। त्रिपुरा के खिलाफ 64 रन, क्वार्टर फाइनल में असम के विरुद्ध 86 रन और सेमीफाइनल में कर्नाटक जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 56 रन की पारी ने यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंच के खिलाड़ी बनने की क्षमता रखते हैं। कई बार क्रिकेट में आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं होते, वे संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी भी कहते हैं। लक्ष्य के ये रन भी कुछ ऐसी ही कहानी कहते हैं। साल 2023-24 की अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी लक्ष्य के करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
पांच मैचों में 833 रन। एक दोहरा शतक। तीन शतक। दो अर्धशतक। और 138.83 की अविश्वसनीय औसत।
यह सिर्फ शानदार प्रदर्शन नहीं था, बल्कि पूरे देश को यह बताने वाला संदेश था कि उत्तराखंड की धरती पर भी ऐसे खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं जो भारतीय क्रिकेट का भविष्य बन सकते हैं। वह उस सीजन में टूर्नामेंट के सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। इसी प्रदर्शन के लिए उन्हें बीसीसीआई के प्रतिष्ठित नमन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।
क्रिकेट में सबसे कठिन काम एक बार अच्छा प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहना होता है। लक्ष्य ने यह साबित किया है कि उनका प्रदर्शन कोई संयोग नहीं था। अंडर-19 वीनू मांकड़ ट्रॉफी 2024-25 में उन्होंने 191 रन बनाए। कूच विहार ट्रॉफी में 396 रन जुटाए, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल रहे। 2025-26 सीजन में भी उनका बल्ला लगातार रन उगलता रहा। वीनू मांकड़ ट्रॉफी के पांच मुकाबलों में 103, 76, 76, 42 और 11 रन की पारियां खेलते हुए उन्होंने कुल 308 रन बनाए।
इन पारियों ने भारतीय टीम तक पहुंचने का रास्ता और मजबूत कर दिया। भारतीय अंडर-19 टीम श्रीलंका दौरे पर तीन एकदिवसीय और दो टेस्ट मैच खेलेगी। लक्ष्य वर्तमान में देहरादून में उत्तराखंड रणजी टीम के कैंप का हिस्सा हैं। 25 जून को वह बेंगलुरु में भारतीय टीम के साथ जुड़ेंगे और 4 जुलाई से शुरू होने वाली श्रृंखला में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। अब केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की निगाहें इस युवा बल्लेबाज पर होंगी। भारत में क्रिकेट केवल खेल नहीं है। यह करोड़ों युवाओं का सपना है। लक्ष्य रायचंदानी की कहानी उन हजारों बच्चों को उम्मीद देती है जो छोटे शहरों के मैदानों में खेलते हैं, जिनके पास बड़े संसाधन नहीं होते, लेकिन बड़े सपने होते हैं। हल्द्वानी से भारतीय टीम तक का यह सफर बताता है कि प्रतिभा अगर मेहनत और अनुशासन के साथ जुड़ जाए तो भौगोलिक सीमाएं मायने नहीं रखतीं। आज लक्ष्य रायचंदानी भारतीय अंडर-19 टीम के उपकप्तान बने हैं। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे एक परिवार का विश्वास, एक कोच की मेहनत, एक शहर का सपना और वर्षों का संघर्ष छिपा हुआ है। शायद यही वजह है कि हल्द्वानी आज सिर्फ एक क्रिकेटर की सफलता का जश्न नहीं मना रहा, बल्कि अपने सपनों को साकार होते हुए देख रहा है। और अब सबकी निगाहें श्रीलंका की पिचों पर हैं, जहां उत्तराखंड का यह युवा सितारा तिरंगे की उम्मीदों के साथ उतरने वाला है।

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