
मोबाइल, डिजिटल डेटा और परिवार की निजता पर जताई आशंका, डीजीपी को पत्र लिखकर पूछा पहले की शिकायत पर अब तक क्या हुआ?
देहरादून। किसी जनप्रतिनिधि के मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और परिवार की निजी जानकारियों की सुरक्षा को लेकर आशंका जताई जाए और शिकायत के बाद भी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट न हो, तो सवाल केवल साइबर सुरक्षा का नहीं रह जाता। सवाल यह भी उठता है कि शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी हासिल करने के लिए आखिर शिकायतकर्ता को कितनी बार दरवाजा खटखटाना पड़ेगा?
हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश की डिजिटल सुरक्षा और पारिवारिक निजता से जुड़ा मामला अब पुलिस मुख्यालय पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ को पत्र लिखकर पूर्व में दी गई शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेने और निष्पक्ष, तकनीकी व समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने विधायक को यह बताने की अपेक्षा की है कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और जांच किस स्तर पर है।
आर्य ने पत्र में सुमित हृदयेश की उन आशंकाओं का उल्लेख किया है, जिनमें उनके मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों, वाहन और परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन से जुड़ी गोपनीय जानकारियों तक अनधिकृत पहुंच बनाए जाने या उनके दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) समेत अन्य डिजिटल तकनीकों के जरिए भ्रामक अथवा कूटरचित ऑडियो-वीडियो सामग्री तैयार कर प्रसारित किए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
मामले का अहम पहलू यह है कि शिकायत से जुड़े आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन जांच की प्रगति की जानकारी न मिलना अपने आप में जवाबदेही का सवाल खड़ा करता है।
नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस प्रशासन से पूर्व शिकायत का रिकॉर्ड तलब कर उसकी प्रगति की समीक्षा करने और जांच लंबित होने पर उसे अनावश्यक देरी के बिना पूरा कराने का आग्रह किया है। उन्होंने संबंधित मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों, सोशल मीडिया खातों और दूसरे डिजिटल माध्यमों की तकनीकी जांच कराने की मांग भी की है।
आर्य ने कहा कि यदि डेटा तक अनधिकृत पहुंच, डिजिटल छेड़छाड़ या एआई के जरिए तैयार कूटरचित सामग्री के प्रसार से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं, तो साइबर विशेषज्ञों की मदद से उनकी प्रमाणिकता की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और संभावित छेड़छाड़ रोकने के लिए भी जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है।
मामला विधायक और उनके परिवार की निजता एवं सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण आर्य ने जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपायों का आकलन करने तथा जांच की प्रगति से शिकायतकर्ता को अवगत कराने का आग्रह किया है।
अब निगाहें पुलिस मुख्यालय पर हैं। डीजीपी को भेजा गया पत्र जांच की मांग को दोबारा सामने लाता है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि संबंधित शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है, डिजिटल साक्ष्यों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और शिकायतकर्ता को स्थिति की स्पष्ट जानकारी कब मिलती है। क्योंकि कानून का भरोसा केवल शिकायत दर्ज होने से नहीं, बल्कि उस पर निष्पक्ष कार्रवाई और जवाबदेही दिखाई देने से मजबूत होता है।


