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हल्द्वानी से एक बार फिर वही पुरानी, थकी हुई और परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है जहां आग लगती है, दमकल पहुंचती है, भीड़ जमा होती है और फिर कुछ समय बाद सब कुछ जांच के आदेश के हवाले कर दिया जाता है।
मामला मुखानी क्षेत्र के केवीएम स्कूल का है, जहां मंगलवार 23 जून की शाम अचानक आग लग गई। शुरुआत में आग स्कूल भवन के एक हिस्से तक सीमित बताई जा रही थी, लेकिन देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। कुछ ही देर में पूरी इमारत धुएं और लपटों में घिर गई।
इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे, अभिभावक और स्थानीय लोग दहशत में आ गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने की कोशिशें शुरू की गईं। आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया।
फिलहाल राहत की बात यही है कि किसी तरह की जनहानि की खबर नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यही है जब एक स्कूल जैसी संवेदनशील जगह पर भी सुरक्षा इंतज़ाम आग की पहली चिंगारी को रोकने में नाकाम दिखें, तो फिर बाकी व्यवस्था पर भरोसा कितना किया जाए?
आग कैसे लगी, क्यों लगी ये सवाल अभी अनसुलझे हैं। जांच की बात कही जा रही है, लेकिन देश में जांचों का हाल भी किसी से छिपा नहीं है: धुआं छंटता है, लेकिन जवाब अक्सर नहीं मिलते।
प्रशासन मौके पर है, स्थिति पर नजर रखे हुए है। लेकिन असली नजर तो उस सिस्टम पर होनी चाहिए जो हर बार ऐसी घटनाओं के बाद ही जागता है और फिर अगले हादसे तक सो जाता है।

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