
BTCFUND.IS मामले में 8.54 करोड़ की संपत्ति कुर्क, हल्द्वानी में भी एआई और हाई रिटर्न के नाम पर निवेश योजनाओं को लेकर बढ़ रहे सवाल
देहरादून/हल्द्वानी। कुछ दिन पहले हल्द्वानी में प्रकाशित हमारी रिपोर्ट में हाई रिटर्न का दावा करने वाली जीएमएफएक्स, मेटा ट्रेड, मेटा वेल निवेश कंपनी के अधिकतर कार्यक्रमो में निवेशकों की घटती मौजूदगी और बढ़ते सवालों का जिक्र किया गया था। उस समय यह सवाल उठाया गया था कि क्या 22 प्रतिशत तक मुनाफे का दावा करने वाली योजनाओं पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही है? अब देहरादून से सामने आई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने एक बार फिर ऐसे निवेश मॉडलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईडी के देहरादून उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुचर्चित BTCFUND.IS बिटकॉइन निवेश घोटाले में आरोपी हेमंत ईश्वर शर्मा की करीब 8.54 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इनमें देहरादून के राजपुर क्षेत्र स्थित बंगला, बीएमडब्ल्यू कारें और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि निवेशकों से जुटाई गई राशि और बिटकॉइन का इस्तेमाल रियल एस्टेट, लग्जरी वाहनों और आलीशान जीवनशैली पर किया गया।
कुछ दिन पहले हल्द्वानी में रामपुर रोड स्थित एक होटल में एआई आधारित (जीएमएफएक्स, मेटा ट्रेड, मेटा वेल) निवेश योजना से जुड़े रिफ्रेशमेंट कार्यक्रम की खबर सामने आई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य निवेशकों का भरोसा बनाए रखना बताया गया, लेकिन अपेक्षित संख्या में निवेशक नहीं पहुंचे। चर्चा इस बात की अधिक रही कि लोग अब नए निवेश करने के बजाय अपना पैसा वापस मांग रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पहले जिन लोगों ने रिश्तेदारों और परिचितों को जोड़कर निवेश कराया था, अब वही लोग भुगतान और भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। इससे साफ संकेत मिला कि शुरुआती उत्साह की जगह अब संदेह ने ले ली है।
देहरादून के BTCFUND.IS और हल्द्वानी में सक्रिय विभिन्न हाई रिटर्न योजनाओं के नाम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन उनका तरीका लगभग एक जैसा दिखाई देता है।
शुरुआत में निवेशकों को असामान्य मुनाफे का भरोसा दिया जाता है। सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप और ऑनलाइन मीटिंग के जरिए सफल निवेशकों के उदाहरण पेश किए जाते हैं। कुछ लोगों को शुरुआती भुगतान भी किया जाता है, जिससे अन्य लोगों का विश्वास बढ़े। इसके बाद नए निवेशकों को जोड़ने का सिलसिला तेज हो जाता है।
जब निवेश का प्रवाह धीमा पड़ता है, तब भुगतान में देरी, तकनीकी समस्याओं या नई नीतियों का हवाला दिया जाने लगता है। अंततः निवेशक अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए भटकने लगते हैं।
ईडी के अनुसार, वर्ष 2014 से 2018 के बीच संचालित कथित निवेश योजना के माध्यम से बड़ी मात्रा में बिटकॉइन जुटाए गए। ब्लॉकचेन विश्लेषण में करीब 856.23 बिटकॉइन, जिनकी वर्तमान अनुमानित कीमत लगभग 200 करोड़ रुपये बताई गई है, को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिन्हित किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के पास आय का कोई वैध स्रोत नहीं था, लेकिन उसने करोड़ों रुपये की संपत्तियां, लग्जरी वाहन और अन्य निवेश किए। इससे पहले भी उसकी 4.56 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड के कई शहरों में एआई, क्रिप्टोकरेंसी, जीएमएफएक्स, मेटा ट्रेड, मेटा वेल जैसी ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल इनकम के नाम पर निवेश योजनाओं का प्रचार तेजी से बढ़ा है। इनमें कम समय में अधिक मुनाफे का दावा कर लोगों को आकर्षित किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश से पहले किसी भी कंपनी का पंजीकरण, नियामकीय स्थिति और कारोबार की पारदर्शिता की जांच करना जरूरी है।
कुल मिलाकर हल्द्वानी की खाली होती बैठकों और देहरादून में ईडी की कार्रवाई से एक बात स्पष्ट होती है कि असामान्य मुनाफे का दावा करने वाली योजनाओं में निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है। किसी भी योजना में यदि कम समय में अत्यधिक रिटर्न का वादा किया जा रहा हो और नए लोगों को जोड़ने पर अधिक जोर दिया जा रहा हो, तो निवेशकों को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है।
