Advertisement
ख़बर शेयर करें -

सोशल मीडिया और संवादहीनता पर सवाल, ख्याल रखने की है जरूरत

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बच्चों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिसने पुलिस, अभिभावकों और समाज सभी को चिंता में डाल दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में अलग-अलग थानों में 13 नाबालिग बच्चों की गुमशुदगी दर्ज की गई है। इनमें अधिकतर मामले 12 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के हैं, और खास बात यह है कि इनमें नाबालिग लड़कियों की संख्या अधिक बताई जा रही है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि देहरादून, ऋषिकेश, सेलाकुई और सहसपुर जैसे क्षेत्रों से लगातार बच्चों के लापता होने की शिकायतें आ रही हैं। कई मामलों में शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि बच्चे छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर घर छोड़ देते हैं या बिना बताए कहीं चले जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवृत्ति के पीछे सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। डॉक्टरों और बाल मनोचिकित्सकों के अनुसार, सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जीवनशैली बच्चों की अपेक्षाएं बढ़ा देती है। जब वास्तविक जीवन उन अपेक्षाओं से मेल नहीं खाता, तो बच्चे भावनात्मक असंतुलन में आकर गलत निर्णय लेने लगते हैं।
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. जया नवानी के अनुसार, बच्चों की निर्णय क्षमता और भावनात्मक परिपक्वता धीरे-धीरे विकसित होती है, लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित प्रभाव इस संतुलन को बिगाड़ रहा है। ऐसे में बच्चे छोटी बातों पर आवेश में आकर घर छोड़ने जैसे कदम उठा लेते हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि परिवारों में संवाद की कमी बच्चों को अंदर से अकेला कर रही है। जब बच्चों को घर में समझा और सुना नहीं जाता, तो उनका रुझान बाहर की दुनिया की ओर बढ़ता है, जो कई बार गलत दिशा में भी जा सकता है।
डॉ. नवानी के अनुसार, घर बच्चों के लिए केवल रहने की जगह नहीं बल्कि भावनात्मक सुरक्षा का केंद्र होना चाहिए। पिछले 10 दिनों में दर्ज 13 मामलों में से अधिकतर किशोर उम्र के हैं। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि लापता हुईं लड़कियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। पुलिस इन सभी मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है। कुछ मामलों में स्थानीय लोग इन घटनाओं को बाहरी क्षेत्रों से आए कामकाजी युवकों से भी जोड़ रहे हैं और सत्यापन व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी इन सभी पहलुओं की जांच जारी रखी है।
देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि गुमशुदगी के मामलों में पुलिस तत्काल कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा, पिछले एक वर्ष में लापता हुए बच्चों में से 93 प्रतिशत को बरामद कर लिया गया है, बाकी की तलाश जारी है। एसएसपी के अनुसार, सोशल मीडिया के साथ-साथ पारिवारिक माहौल और औद्योगिक क्षेत्रों का सामाजिक वातावरण भी इन घटनाओं में भूमिका निभा रहा है।
यह मामला अब केवल पुलिस की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर बच्चे घर से दूर क्यों जा रहे हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान केवल निगरानी नहीं, बल्कि संवाद, समझ और डिजिटल संतुलन में छिपा है।

Comments