Advertisement
ख़बर शेयर करें -

काशीपुर की अशना नकी बनीं सबसे कम उम्र की पुस्तक लेखक, कहानियों में बच्चों के सपनों और सीख की दुनिया

काशीपुर। कभी-कभी खबरें शोर नहीं करतीं। धीरे से आती हैं और उम्मीद की तरह दिल में जगह बना लेती हैं। यह खबर भी ऐसी ही है। मोबाइल की स्क्रीन, रील्स और छोटे वीडियो के इस दौर में अगर कोई 12 साल की बच्ची किताब लिख रही हो, कहानियां गढ़ रही हो और उसे दुनिया तक पहुंचा रही हो, तो यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
काशीपुर की रहने वाली और आर्मी पब्लिक स्कूल हेमपुर में कक्षा आठ की छात्रा अशना नकी अब पुस्तक लेखक बन गई हैं। महज 12 वर्ष की उम्र में उनका बाल कहानी संग्रह यंग माइंड ग्रेट लेसंस प्रकाशित हुआ है। इस पुस्तक को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाल पुस्तक प्रकाशक ब्री बुक्स ने प्रकाशित किया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि अशना अपने परिवार की पांचवीं और सबसे कम उम्र की पुस्तक लेखक हैं। उनके घर में किताबें सिर्फ अलमारी में नहीं रहतीं, लिखी भी जाती हैं। पिता डॉ. नकी उद्दीन कॉमर्स विषय पर पुस्तक लिख चुके हैं। बड़े अंकल नदीम उद्दीन की 45 से अधिक कानूनी और जनजागरूकता विषयक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। चाचा डॉ. जिया उद्दीन इंजीनियरिंग गणित पर पुस्तकें लिख चुके हैं, जबकि बड़ी बहन नीलिमा नदीम भी कानूनी जागरूकता विषय पर लेखन कर चुकी हैं।
लेकिन अशना की कहानी अलग है। क्योंकि यह उस उम्र की कहानी है, जब बच्चे अक्सर किताबें पढ़ने से बचते हैं। अशना ने किताब लिख दी।
यह पुस्तक स्कूल के एक विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत तैयार हुई है। स्कूल के चेयरमैन ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह की प्रेरणा और प्रधानाचार्य डॉ. मालिनी शर्मा के नेतृत्व में छात्रों को युवा लेखक के रूप में विकसित करने का अभियान चलाया गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक ब्री बुक्स के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम में बच्चों को अपनी कल्पनाओं और विचारों को शब्द देने का अवसर मिला। कार्यक्रम के संयोजक और स्कूल के अंग्रेजी प्रवक्ता अतुल यादव रहे।
अशना ने न सिर्फ यह पुस्तक लिखी, बल्कि उसकी डिजाइनिंग में भी योगदान दिया। उनकी पुस्तक में 10 प्रेरणादायक बाल कहानियां शामिल हैं, जिनमें सीख भी है, संवेदना भी और बच्चों की मासूम दुनिया भी।
आज जब बच्चों की दुनिया तेजी से डिजिटल होती जा रही है, तब किसी छोटे शहर की बच्ची का किताब लिखना उम्मीद जगाता है। यह सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि यह बताता है कि अगर परिवार और स्कूल साथ खड़े हों तो बच्चों की कल्पनाएं कितनी दूर तक उड़ान भर सकती हैं। अशना की इस उपलब्धि पर स्कूल प्रबंधन, शिक्षक, छात्र-छात्राओं, अधिवक्ताओं और पत्रकारों ने खुशी जताई है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
काशीपुर की यह छोटी सी बच्ची बता रही है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती। किताबें अब भी लिखी जा रही हैं। और उन्हें लिखने वाले हाथ अब बहुत छोटे-छोटे भी हो गए हैं।

Comments

[gs-fb-comments]