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हल्द्वानी का शरदोत्सव मेला राज्य मेला कैलेंडर में शामिल करने की मांग, संस्कृति, स्वरोज़गार और युवाओं के सपनों को मंच देने की पहल

हल्द्वानी। खबरों की भीड़ में यह एक ऐसी खबर है, जिसमें शोर कम है और उम्मीद ज़्यादा। एक मेला जो पिछले पच्चीस साल से चुपचाप लोगों को जोड़ता रहा अब सरकारी कैलेंडर में जगह मांग रहा है। नाम है शरदोत्सव मेला, हल्द्वानी। संस्थान के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी ए.पी. बाजपेयी के माध्यम से दो ज्ञापन सौंपे। मांग सीधी है 1999 से लगातार आयोजित हो रहे इस पारंपरिक मेले को उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक राज्य मेला कैलेंडर में शामिल किया जाए। वर्ष 1997 में पंजीकृत मानव विकास सेवा संस्थान 1999 से इस मेले का आयोजन कर रहा है। करीब ढाई दशक का सफर। हर साल पांच दिन। मंच पर लोकनृत्य, लोकसंगीत, पहाड़ की बोली, लोकसंस्कृति की खुशबू। मेले के मुख्य संरक्षक जिलाधिकारी नैनीताल होते हैं और संरक्षक मंडल में उपजिलाधिकारी व नगर मजिस्ट्रेट शामिल रहते हैं। यानी प्रशासन की मौजूदगी रही है, बस आधिकारिक कैलेंडर की मुहर अभी बाकी है। संस्थान के अध्यक्ष विक्की योगी जो पहले उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं कहते हैं, यह मेला सिर्फ मनोरंजन नहीं, पहचान का मंच है। युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है। वे कहते हैं यह मेला सिर्फ नृत्य और गीत तक सीमित नहीं है। स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानों से छोटे व्यापारियों को बाज़ार मिलता है। स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं को मंच मिलता है। स्थानीय कलाकारों को पहचान मिलती है। पर्यटन और फिल्म गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। राजस्व भी आता है, रोज़गार भी बनता है। एक छोटे शहर का मेला, बड़ी संभावनाओं के साथ खड़ा है। संस्थान ने अपने दूसरे ज्ञापन में जनपद नैनीताल के छोटा कैलाश में आयोजित शिवरात्रि मेले को एक सप्ताह तक आयोजित करने की मांग की है। साथ ही जिलाधिकारी नैनीताल के मार्गदर्शन में उपजिलाधिकारी नैनीताल को नोडल अधिकारी नियुक्त कर सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है। संस्थान का तर्क है कि पर्यटन और तीर्थाटन राज्य की आय के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो राज्य को भी लाभ होगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट, दर्जा राज्य मंत्री रेनू अधिकारी, मेयर गजराज सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत सहित अन्य अधिकारियों को भी भेजी गई है। कुल मिलाकर यह मांग सिर्फ एक तारीख़ को सरकारी सूची में दर्ज कराने की नहीं है। यह उस श्रम, उस निरंतरता और उस सांस्कृतिक जिद को पहचान देने की मांग है, जो पच्चीस साल से हल्द्वानी में सांस ले रही है। क्योंकि राज्य के मेले सिर्फ आयोजन नहीं होते वे सामाजिक संवाद के स्थल होते हैं। जहां गांव-शहर मिलते हैं, जहां परंपरा और आधुनिकता एक ही मंच पर खड़ी होती हैं। अब देखना है कि शरदोत्सव मेला को राज्य मेला कैलेंडर में जगह मिलती है या नहीं। लेकिन इतना तय है हल्द्वानी का यह मेला अपनी जगह बना चुका है, सरकारी सूची में नहीं तो लोगों के दिलों में जरूर।

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