
कुमायूँ में आईजी रिद्धिम अग्रवाल का आधी रात छापा, रजिस्टरों में गड़बड़ी पर फटकार खराब सीसीटीवी और बिना बीट बुक गश्त पर सख्त नाराज़गी
नैनीताल/ हल्द्वानी। रात गहरी थी। सड़कें शांत थीं। लेकिन पुलिस की सतर्कता की परीक्षा चल रही थी। और इसी परीक्षा के बीच अचानक पहुंचीं कुमायूँ की आईजी रिद्धिम अग्रवाल। देर रात, शहर के नाकों, पुलिस बैरियरों और चौकी क्षेत्रों में हुआ यह निरीक्षण सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं था। यह पुलिसिंग की असलियत का आईना था।
नाकों पर वाहन चेकिंग हो रही थी। पुलिसकर्मी मौजूद थे। लेकिन जब आईजी ने आगंतुक रजिस्टर और वाहन आवाजाही से जुड़े अभिलेख देखे तो कई जगह प्रविष्टियाँ अधूरी मिलीं। कहीं समय दर्ज नहीं था, कहीं वाहन नंबर अधूरा था। आईजी ने मौके पर ही संबंधित थाना प्रभारियों को कड़े शब्दों में निर्देश दिए सभी रजिस्टर तत्काल प्रभाव से अपडेट हों। 24 घंटे में पूर्ण रिपोर्ट मेरे कार्यालय में हो। यह सिर्फ निर्देश नहीं था, जवाबदेही की चेतावनी थी। निरीक्षण के दौरान कुछ चौकी क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब पाए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इसकी सूचना न थाना प्रभारी को दी गई थी, न ही क्षेत्राधिकारी को। आईजी ने स्पष्ट कहा निगरानी तंत्र पुलिस की आँख है। आँख बंद रहेगी तो जवाबदेही तय होगी। सभी कैमरों की तत्काल मरम्मत और कार्यशीलता की रिपोर्ट तलब की गई है। रात की गश्त पर तैनात कुछ कर्मचारियों के पास न बीट बुक थी, न ई-बीट बुक। वायरलेस सेट भी उपलब्ध नहीं थे। यह स्थिति आईजी को नागवार गुज़री। निर्देश साफ़ थे हर गश्ती कर्मचारी के पास बीट बुक, ई-बीट बुक अनिवार्य होगी। सत्यापन, संदिग्ध व्यक्तियों और आगंतुकों का पूरा विवरण दर्ज होगा। वायरलेस संपर्क हर हाल में सक्रिय रहेगा। क्योंकि गश्त सिर्फ चलना नहीं, सूचना तंत्र का जीवित रहना है। वाहन चेकिंग के दौरान कई ओवरलोड वाहन पकड़े गए। मौके पर ही सीज की कार्रवाई कराई गई। संदेश साफ़ था कानून सड़क पर भी लागू होगा और रजिस्टर में भी। आईजी कुमायूँ ने दो टूक कहा नाकों, बैरियर, सीसीटीवी निगरानी और बीट प्रणाली पुलिसिंग की रीढ़ हैं।
इनमें लापरवाही मिली तो कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है। कुल मिलाकर यह निरीक्षण सिर्फ शहर का नहीं था। यह पूरे कुमायूँ परिक्षेत्र के लिए संकेत था जीरो टॉलरेंस सिर्फ नारा नहीं, प्रशासनिक संकल्प है। जब रात में अफसर खुद सड़क पर उतर आएँ, तो यह संदेश दूर तक जाता है सतर्कता ड्यूटी नहीं, प्रतिबद्धता है। और इस प्रतिबद्धता की परीक्षा हर रात होती है।
