
डॉ. जगदीश चन्द्र को राष्ट्रपति पुलिस पदक, एसपी हरबन्स सिंह को गोल्ड मेडल; कर्तव्यनिष्ठा के साथ सूझबूझ और मानवीय संवाद की भी हुई सराहना
देहरादून। पुलिस की पहचान अक्सर वर्दी, कानून और कार्रवाई से होती है, लेकिन उसकी असली परीक्षा तब होती है, जब हालात तनावपूर्ण हों और एक छोटी सी चूक भी शांति व्यवस्था को बिगाड़ सकती हो। ऐसे समय में धैर्य, संवेदनशीलता और संवाद ही सबसे बड़ी ताकत बनते हैं। उत्तराखंड पुलिस के दो अधिकारियों को मिला सम्मान इसी कर्तव्यनिष्ठा और जिम्मेदारी की कहानी कहता है।
उत्तराखंड पुलिस के लिए गौरव के क्षण में दो अधिकारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। नैनीताल में तैनात पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात डॉ. जगदीश चन्द्र (आईपीएस) को सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया गया। वहीं, एसपी हल्द्वानी हरबन्स सिंह को प्रदेश में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए गोल्ड मेडल से अलंकृत किया गया।
रिजर्व पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित राष्ट्रपति पुलिस निशान अलंकरण समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में डॉ. जगदीश चन्द्र को पदक प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी कर्तव्यनिष्ठा और पुलिस सेवा में किए गए सराहनीय कार्यों की पहचान बना।
दूसरी ओर, हरबन्स सिंह का सम्मान उस सूझबूझ और धैर्य की कहानी से जुड़ा है, जब कानून व्यवस्था की चुनौती के बीच संवाद ने टकराव की आशंका को शांतिपूर्ण समाधान में बदल दिया। रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में सिख समुदाय के कुछ लोगों के प्रवेश और विरोध के दौरान उन्होंने संयम और कुशल संवाद का परिचय दिया। बातचीत के जरिए स्थिति को शांत कराया और सभी को शांतिपूर्वक बाहर निकलने के लिए समझाया।
इतना ही नहीं, निहंगों के जत्थे द्वारा विरोध स्वरूप पांवटा साहिब जाने के प्रयास के दौरान भी हरबन्स सिंह ने प्रभावी संवाद और सूझबूझ से स्थिति को संभाला। किसी अप्रिय घटना की नौबत नहीं आने दी और प्रदेश में शांति व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती ने एसपी हरबन्स सिंह को गोल्ड मेडल पहनाकर सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक अधिकारी की कार्यकुशलता का नहीं, बल्कि उस पुलिसिंग का भी प्रतीक है, जिसमें कानून की सख्ती के साथ मानवीय संवेदना और बातचीत की ताकत को भी बराबर महत्व दिया जाता है।
दो अधिकारियों का सम्मान यह संदेश देता है कि वर्दी का गौरव केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने, मुश्किल वक्त में विवेक बनाए रखने और समाज में विश्वास कायम करने से भी बढ़ता है।


