
गुलदार के हमले के बाद वन अधिकारियों का घेराव और मारपीट, उप वन क्षेत्राधिकारी संघ ने सीएम से मांगी सुरक्षा; दोषियों पर मुकदमा नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
देहरादून। जंगल में वन्यजीवों की निगरानी और आबादी में घुस आए गुलदार से लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी वन विभाग के कर्मचारियों की है, लेकिन जब कोई अनहोनी होती है तो गुस्से का निशाना भी सबसे पहले यही कर्मचारी बनते हैं। पौड़ी में गुलदार के हमले में हुई मानव क्षति के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज और घेराव की घटना ने एक बार फिर मैदानी मोर्चे पर काम कर रहे वनकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन नवंबर को पौड़ी जिले में गुलदार के हमले में हुई जनहानि पर उप वन क्षेत्राधिकारी संघ, उत्तराखंड ने शोक जताते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही घटना के बाद ड्यूटी पर तैनात विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार को गंभीर और आपराधिक कृत्य बताया है। संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर दोषियों के खिलाफ तत्काल नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
संघ का कहना है कि वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी विषम परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर गश्त, वन्यजीव नियंत्रण और जनसुरक्षा का काम करते हैं। वन्यजीवों के हमलों को रोकना चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन हर घटना के बाद कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराकर उनके साथ हिंसक व्यवहार करना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल टूटता है, बल्कि उनमें भय और असुरक्षा का माहौल भी बन रहा है।
संघ ने संवेदनशील क्षेत्रों में रात्रिकालीन गश्त और वन्यजीव आपदा प्रबंधन के दौरान वनकर्मियों को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही अफवाह फैलाकर लोगों को उकसाने वाले तत्वों पर निगरानी रखने की भी पैरवी की है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए शासन और प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो संगठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगा। पत्र पर संघ के अध्यक्ष मुकेश बहुगुणा और महामंत्री दिनेश कुकरेती के हस्ताक्षर हैं। इसकी प्रतिलिपि वन मंत्री, प्रमुख सचिव वन, प्रमुख वन संरक्षक और पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है।


