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उत्तराखंड की सत्ता में विभागों का गणित और जनता का सवाल

देहरादून से खबर है और खबर सिर्फ इतनी नहीं कि मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है, खबर ये है कि सत्ता के गलियारों में अब जिम्मेदारियों का नया नक्शा तैयार हुआ है। लंबे इंतज़ार के बाद जिन चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिली, उन्हें अब ऐसे विभाग दिए गए हैं जिनसे सीधे जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी जुड़ी है। लेकिन सवाल वही है क्या विभाग बदलने से व्यवस्था बदलेगी?
सबसे अहम विभाग वित्त, शहरी विकास, आवास अब मदन कौशिक के पास हैं। मतलब साफ है, राज्य की आर्थिक सेहत और शहरों की तस्वीर अब उनके फैसलों से तय होगी। पहले ये जिम्मेदारी प्रेमचंद अग्रवाल संभाल रहे थे। अब चेहरा बदला है क्या हालात भी बदलेंगे?
खजान दास को समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण जैसे विभाग मिले हैं। ये वो मंत्रालय हैं जहाँ फाइलों में नहीं, ज़मीन पर असर दिखना चाहिए। योजनाएं कागज़ से निकलकर लोगों तक पहुंचेंगी या नहीं यही असली परीक्षा है। भरत सिंह चौधरी को परिवहन और एमएसएमई जैसे विभाग दिए गए हैं। पहाड़ों में रोजगार की कमी कोई नई खबर नहीं है। सवाल ये है कि क्या ये विभाग सिर्फ आंकड़ों में रोजगार बढ़ाएंगे या सच में युवाओं को काम मिलेगा?
प्रदीप बत्रा को पेयजल विभाग मिला है। सुनने में साधारण लगता है, लेकिन पहाड़ों में पानी सबसे बड़ी राजनीति है। नल में पानी आएगा या सिर्फ घोषणाएं बहेंगी ये देखना होगा। राम सिंह कैड़ा के पास ऊर्जा और आयुष जैसे विभाग हैं। एक तरफ बिजली, दूसरी तरफ परंपरागत चिकित्सा दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ संभावनाएं भी हैं और चुनौतियां भी।
तो कुल मिलाकर सरकार ने विभाग बांट दिए हैं, जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। लेकिन असली खबर ये नहीं है कि किसे क्या मिला असली खबर ये है कि जनता को क्या मिलेगा?

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