
हल्द्वानी से एक ऐसी खबर आई है, जो शोर नहीं करती लेकिन दूर तक सुनाई देती है। यह कहानी है एक छोटे से बच्चे की, जिसने शतरंज की बिसात पर उम्र को पीछे छोड़ दिया।
उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी तेजस तिवारी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। वजह? महज 5 साल, 5 महीने और 7 दिन की उम्र में फाइड-रेटेड शतरंज खिलाड़ी बनना। यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है यह उस धैर्य, अनुशासन और एकाग्रता का परिणाम है, जो अक्सर बड़े-बड़े खिलाड़ियों में भी ढूंढना पड़ता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह उपलब्धि जून 2023 में हासिल हुई थी। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा प्रमाणपत्र जून 2024 में जारी किया गया, लेकिन तेजस को यह अप्रैल 2026 में प्राप्त हुआ। यानी, यह खबर थोड़ी देर से आई लेकिन आई पूरी मजबूती के साथ।
तेजस की शतरंज यात्रा 3.5 साल की उम्र में शुरू हुई थी। आमतौर पर इस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, लेकिन तेजस ने मोहरों से खेलना चुना। और यही चुनाव उन्हें आज इस मुकाम तक ले आया है।
इससे पहले भी तेजस की प्रतिभा को पहचान मिली है। वर्ष 2024 में उन्हें गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स से जुड़े एक शतरंज टूर्नामेंट में भागीदारी के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ था। यह संकेत था कि उनकी चालें सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक मंच तक पहुंच रही हैं।
तेजस तिवारी फिलहाल हल्द्वानी के दिक्शांत इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा 3 के छात्र हैं। स्कूल की किताबों और शतरंज की बिसात के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन तेजस इसे सहजता से निभा रहे हैं।
यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि यह हमें याद दिलाती है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। सवाल सिर्फ इतना है क्या हम उस प्रतिभा को पहचान पाते हैं?
हल्द्वानी से निकली यह कहानी अब रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो चुकी है। और शायद, यह तो सिर्फ शुरुआत है।
