
पंतनगर। निकटवर्ती शांतिपुरी में सरकारी अस्पताल की स्थिति इतनी बदहाल हो चली है कि मरीजों के इलाज करने से पहले उसे स्वयं अपना इलाज करना होगा। हकीकत में ये अस्पताल स्वयं रोगी बना बैठा है। ना पूरे डॉक्टर हैं और ना भवन की अच्छी हालत। लंबे समय से डॉक्टरों पद रिक्त हैं और आपातकालीन चिकित्सा सेवा पूरी तरह से ठप है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री यह बयान देते हैं कि हमारे डॉक्टर मरीज को ढूंढ रहे हैं लेकिन यहां तो पूरा अस्पताल ही डॉक्टरों को ढूंढ रहा है। शांतिपुरी अस्पताल में अभिलंब आकस्मिक चिकित्सा सेवा शुरू करने की साथ ही चिकित्सकों की स्थाई तैनाती होना ज़रूरी है।
मालूम हो कि शांतिपुरी सैनिक बाहुल्य क्षेत्र और यहां के सरकारी अस्पताल पर 45 से 50 हजार आबादी चिकित्सा सुविधाओं के लिए निर्भर है। ऐसे में अस्पताल में इमरजेंसी चिकित्सा सेवा डॉक्टरों की नियुक्ति एवं एंबुलेंस सेवा जैसे महत्वपूर्ण सुविधाओं का ना होना क्षेत्र की घोर उपेक्षा है। अस्पताल परिसर में डॉक्टरों व कर्मचारियों के लिए आवास बने होने के बावजूद वहां कोई भी कर्मचारी निवास नहीं करता, जिससे आवास जर्जर व बंजार हालत में पहुंच चुके हैं। करीब 10–12 वर्ष पूर्व अस्पताल में 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध थी तथा पुरुष व महिला चिकित्सक तैनात रहते थे, लेकिन वर्तमान में लगभग 45 से 50 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित है।क्षेत्रवासी अस्पताल जाते हैं और बिना चिकित्सा के ही मायूस होकर लौट आते हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्र के निवासी हैं। 15 से 20 किलोमीटर क्षेत्र में यह एकमात्र सरकारी अस्पताल है जहां पर ना डॉक्टर है ना इमरजेंसी सेवा ऐसे में महिलाओं की डिलीवरी होती है या कोई इमरजेंसी होती है तो ग्रामीणों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है और मजबूरी में उन्हें बाहर महंगे अस्पतालों में जाना पड़ता है। उनकी गुहार है कि सरकार उनकी समस्या कब समझेगी और कब लोगों को उचित इलाज मिल सकेगा।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद कोरंगा, सूबेदार मेजर लाल सिंह एवं पूर्व प्रधान नारायणी देवी के नेतृत्व में शांतिपुरी में आपातकालीन चिकित्सा सेवा व डॉक्टरों की नियुक्ति को लेकर ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन कर रोष व्यक्त किया। धरना प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए क्षेत्र की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने के बावजूद लंबे समय से एक भी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई। किच्छा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल गौड़ को ग्रामीणों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है। समाधान नहीं किए जाने की स्थिति में क्षेत्रवासियों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन व जिला मुख्यालय का घेराव करने की चेतावानी भी दी है। धरना प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य प्रेम आर्य, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद कोरंगा, अधिवक्ता नवीन चंद उर्फ बिट्टू, देवेंद्र कोरंगा, युवक मंगल दल अध्यक्ष मोहन सिंह कोरंगा, सागर टाकुली, तनुज टाकुली, करन दफोटी, दीपा बिष्ट, उमा बिष्ट, पीतांबर चंदोला, भगत सिंह कोरंगा, पूर्व सैनिक बी.डी. भट्ट, गंगा दफोटी, सैनिक संगठन अध्यक्ष लाल सिंह कोरंगा, मोहन चंद्र जोशी, पूर्व प्रधान नारायणी कोरंगा, बिशन सिंह कोरंगा, चंचल सिंह रौतेला, हेम सिंह नेगी सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।
