
वन विभाग के उप वन क्षेत्राधिकारी निलंबित, गोपनीय दस्तावेज़ रखने और दुरुपयोग का आरोप
देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। विभाग ने उप वन क्षेत्राधिकारी कुलदीप सिंह पंवार को गंभीर अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में सामने आया कि पंवार के पास ऐसे गोपनीय और संवेदनशील सरकारी दस्तावेज़ पाए गए, जो उन्हें न तो आधिकारिक रूप से जारी किए गए थे और न ही किसी वैधानिक प्रक्रिया के तहत प्राप्त किए गए थे। मामला तब उजागर हुआ जब वन संरक्षक, अनुसंधान वृत्त हल्द्वानी को एक पत्र मिला। पत्र में आरोप लगाया गया कि उप वन क्षेत्राधिकारी के पास विभागीय अभिलेख मौजूद हैं, जिनकी कोई वैधानिक स्वीकृति नहीं है। जांच में स्पष्ट हुआ कि ये दस्तावेज़ न प्रमाणित थे और न ही किसी सक्षम अधिकारी द्वारा अधिकृत।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन अभिलेखों का उपयोग किया गया, उनमें व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी शामिल थी। विभाग ने इसे संविधान के तहत नागरिकों के निजता के अधिकार का सीधा उल्लंघन माना है। अधिकारियों का कहना है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना कानूनी अनुमति ऐसे दस्तावेज़ों का उपयोग नहीं कर सकता। जांच में उप वन क्षेत्राधिकारी को उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 2002 के नियम 3(1), 3(2) और 9 का दोषी पाया गया। इसके साथ ही मामला भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 303, 61, 356 समेत अन्य गंभीर धाराओं के दायरे में भी आता है। वन विभाग ने 11 नवंबर 2025 को पंवार से स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद उन्हें कई अवसर दिए गए, लेकिन न तो उन्होंने दस्तावेज़ों के स्रोत की जानकारी दी और न ही यह स्पष्ट किया कि अभिलेख किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत हासिल किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) रंजन मिश्र ने पंवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और वे शिवालिक वृत्त उत्तराखंड कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।
वन विभाग ने साफ किया है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है। यदि आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं, तो पंवार के खिलाफ और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में सरकारी दस्तावेज़ों की सुरक्षा और आरटीआई नियमों के पालन पर सख्ती बढ़ाई जाएगी।
वहीं प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा से ही व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रह सकता है।
