
संजय रावत
हल्द्वानी। शहर में ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी का एक और मामला सामने आया है। कुछ महीने पहले चर्चित रही जीएमएफएक्स कंपनी के बाद अब मेटा ट्रेड और मेटा वेल जैसे नामों से निवेशकों को निशाना बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार ठगी का तरीका पूरी तरह डिजिटल हो गया है ऑफिस की जगह मोबाइल ऐप और जूम मीटिंग्स ने ले ली है।
बता दें कि मेटा ट्रेड नाम की कथित कंपनी निवेशकों को हर महीने 22 प्रतिशत रिटर्न देने का दावा कर रही थी। इसके साथ ही निवेश पर थाईलैंड यात्रा जैसे ऑफर भी दिए जा रहे थे। उच्च रिटर्न और आकर्षक ऑफर के चलते कई लोग इसमें निवेश करने के लिए तैयार हो गए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद दैनिक जनवाणी ने यह मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद कंपनी से जुड़े कुछ लोगों के फोन आने लगे, जिन्होंने खुद को इस नेटवर्क से अलग बताते हुए सफाई दी। हालांकि, कंपनी के मुख्य संचालक ने खबर प्रकाशित होने के बाद से अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, जिन निवेशकों ने पैसा लगाया था, वे अब अपनी रकम वापस पाने के लिए दबाव बना रहे हैं।
यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब मेटा वेल जैसे नामों से निवेशकों को निशाना बनाया जा रहा है। इसमें ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित है।
रोज़ रात करीब 8 बजे लोगों के मोबाइल पर जूम मीटिंग का लिंक भेजा जाता है। इस वर्चुअल मीटिंग में एक महिला होस्ट प्रोफेशनल अंदाज में शुरुआत करती है
अलग-अलग लोग अपनी सफलता की कहानी बताते हैं अंत में एक तथाकथित बॉस आता है, जो अपना कैमरा ऑन नहीं करता यानी बिना चेहरा दिखाए वह रोज़ लाखों कमाने का दावा करता है।
इस पूरी प्रक्रिया से निवेशकों के बीच भरोसा पैदा किया जाता है। इस वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से कंपनी निवेश के लिए फिजिकल स्लॉट जैसे जटिल शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे योजना विश्वसनीय लगे। असल में यह एक चेन सिस्टम है, जिसमें निवेशक को अपना पैसा दोगुना करने के लिए नया निवेशक जोड़ना होता है, नया व्यक्ति पुराने निवेशक की रकम अधिक कीमत पर खरीदता है और यह सिलसिला तब तक चलता है, जब तक नए लोग जुड़ते रहते हैं। जैसे ही नए निवेशक मिलना बंद होते हैं, पूरा सिस्टम टूट जाता है। निवेशकों को जोड़ने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए जाते हैं। इनमें फर्जी स्क्रीनशॉट शेयर किए जाते हैं, जिनमें भारी मुनाफा दिखाया जाता है। कोई 50 हजार से 2 लाख बनाने का दावा करता है, तो कोई कंपनी को धन्यवाद देता नजर आता है। इससे नए लोगों का भरोसा बढ़ता है। इस ठगी नेटवर्क में बेरोजगार महिलाओं व युवाओं को जोड़ा जा रहा है। उन्हें कमीशन का लालच देकर अपने परिचितों को जोड़ने के लिए कहा जाता है।
यही कारण है कि यह नेटवर्क तेजी से लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। निवेशकों को एक ऐप के जरिए उनका बैलेंस दिखाया जाता है। यह बैलेंस डॉलर में होता है और लगातार बढ़ता हुआ नजर आता है। लेकिन हकीकत में यह सिर्फ स्क्रीन पर दिखने वाला आंकड़ा होता है। जैसे ही निवेशक बड़ी रकम लगाते हैं, नेटवर्क गायब हो जाता है।हल्द्वानी, जिसे कुमाऊँ का प्रवेश द्वार कहा जाता है, अब इस तरह की ऑनलाइन ठगी का केंद्र बनता जा रहा है। हालांकि, यह समस्या सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है। उत्तराखण्ड राज्य के कई हिस्सों में इसी तरह के नेटवर्क सक्रिय हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। कुल मिलाकर तेजी से पैसा कमाने की चाह और डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच ने ठगों के लिए रास्ता आसान बना दिया है। ऐसे में निवेश से पहले सतर्कता और जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है।
