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नैनीताल से एक खबर है। खबर सिर्फ 9 लोगों के जिला बदर होने की नहीं है खबर उस प्रशासन की भी है, जो अक्सर कागज़ों में दिखता है लेकिन इस बार ज़मीन पर दिखाई दे रहा है। नैनीताल में जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के तहत कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गुंडा घोषित किया है। और सिर्फ घोषित ही नहीं किया उन्हें 6 महीने के लिए जिले की सीमा से बाहर भेज दिया गया है। ये वो लोग हैं, जिनके नाम पुलिस रिकॉर्ड में बार-बार दर्ज होते रहे कभी जुआ, कभी एनडीपीएस, कभी आर्म्स एक्ट और धीरे-धीरे ये नाम एक डर में बदल जाते हैं। ऐसा डर, जो किसी मोहल्ले की चुप्पी में बस जाता है। लेकिन इस बार, प्रशासन ने उस चुप्पी को तोड़ने की कोशिश की है। इस कार्रवाई के पीछे हैं जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल जिन्होंने कागज़ों पर नहीं, आदेशों में सख्ती दिखाई है।
9 लोगों को जिला बदर करने का मतलब सिर्फ उन्हें बाहर भेजना नहीं है ये एक संदेश है कि कानून, अगर चाहे, तो दिख भी सकता है। और दिलचस्प बात ये है कि इसी कार्रवाई में 5 लोगों को राहत भी मिली है। उनके खिलाफ गुंडा एक्ट के नोटिस निरस्त कर दिए गए। यानी प्रशासन सिर्फ सख्ती नहीं कर रहा वह यह भी देख रहा है कि कौन बदल रहा है। यह संतुलन है और यही प्रशासन की असली परीक्षा होती है। नैनीताल में जो हुआ, वह एक छोटी खबर लग सकती है लेकिन छोटे शहरों में कानून का असर ही सबसे बड़ा होता है, क्योंकि वहां खबरें नहीं सीधे जिंदगी बदलती है। और इस बार लगता है कि डर का इलाका थोड़ा छोटा हुआ है और कानून का दायरा थोड़ा बड़ा।

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