
सिक्का कौन सा चलेगा? बाजार के भ्रम पर आरबीआई की दो टूक
देहरादून/ हल्द्वानी: बाजार में इन दिनों एक अजीब सा डर घूम रहा है। डर महंगाई का नहीं, डर बेरोज़गारी का नहीं डर है सिक्कों का। ग्राहक हाथ में सिक्का लिए खड़ा है और दुकानदार आंखें सिकोड़कर उसे ऐसे देख रहा है, जैसे कोई नकली नोट पकड़ा दिया गया हो। कभी सिक्का छोटा है, कभी मोटा है, कभी उस पर डिजाइन बदला हुआ है। और सवाल वही ये सिक्का चलेगा या नहीं? सूत्र बताते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कोई 10 रुपए का सिक्का लेने से मना कर देता है, तो कहीं 20 रुपए के सिक्के पर बहस हो जाती है। ऐसे में भारतीय रिज़र्व बैंक को सामने आना पड़ा और आरबीआई ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि भ्रम फैलाना बंद कीजिए।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दो टूक कहा है कि 1 रुपए, 2 रुपए, 5 रुपए, 10 रुपए और 20 रुपए के सभी सिक्के पूरी तरह वैध हैं। चाहे उनका डिजाइन अलग हो, आकार अलग हो या रंग थोड़ा फीका क्यों न पड़ गया हो, सिक्का सिक्का ही रहेगा। आरबीआई के मुताबिक, एक ही मूल्यवर्ग के कई डिजाइन होना कोई नई बात नहीं है। यह वर्षों से चलता आ रहा है। लेकिन अफवाहों ने बाजार में अविश्वास पैदा कर दिया है और उसी अविश्वास का खामियाजा आम आदमी भुगत रहा है। आरबीआई साफ कहता है कि डिजाइन बदलने का मतलब यह नहीं कि पुराना सिक्का अमान्य हो गया। यह सोच कि ये नया नहीं है, इसलिए नहीं चलेगा पूरी तरह गलत है। अब सवाल यहां आकर अटकता है। आप सब्ज़ी खरीदने गए, जेब में सिक्का है, दुकानदार ने मना कर दिया। तो आप क्या करें? आरबीआई का जवाब साफ है आप उस सिक्के को अपने नजदीकी बैंक में जाकर नकद में बदल सकते हैं। हर सिक्का भारतीय मुद्रा है, उसकी कीमत बराबर है और उसकी वैधता पर कोई सवाल नहीं। असली समस्या क्या है? असल समस्या सिक्कों की नहीं है। असल समस्या जानकारी की कमी और अफवाहों की भरमार है। और जब बाजार में अफवाह चलती है, तो सबसे पहले चोट आम आदमी को लगती है।आज जरूरत इस बात की है कि
दुकानदार भी समझें, ग्राहक भी समझें और हम सब मिलकर यह सवाल उठाएं कि जब आरबीआई कह रहा है कि सिक्का वैध है, तो बाजार क्यों नहीं मान रहा? क्योंकि अगर हम सिक्के को शक की नजर से देखेंगे, तो कल नोट भी सवालों के घेरे में आ जाएंगे।
