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एसएसपी के एक्शन की हो रही प्रशंसा, अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश

हल्द्वानी। शहर के कई निजी अस्पताल अपने मरीजों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी की बजाय मुनाफे की दौड़ में मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार कर रहे हैं। ताजा मामला इसी घिनौनी प्रवृत्ति को उजागर करता है। पर्वतीय क्षेत्रों से इलाज कराने आए मरीजों को कुछ निजी अस्पताल गिद्ध की तरह नोचते हैं। जब मरीज की हालत गंभीर होती है, तो उन्हें सरकारी अस्पतालों की ओर रेफर कर दिया जाता है।
हालांकि, सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के बावजूद गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। परंतु निजी अस्पतालों का रवैया इस जिम्मेदारी के बिल्कुल विपरीत है।
3 जनवरी की रात, नंदन बिरौड़िया, निवासी गोलना करड़िया, अल्मोड़ा ने अपनी पत्नी सीमा बिरौड़िया को बेस अस्पताल अल्मोड़ा से चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी में रेफर किया। लेकिन, इलाज के दौरान उनकी पत्नी की मौत हो गई।
परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने पहले ही 57 हजार रुपए भुगतान कर दिए थे, और अब अतिरिक्त 30 हजार रुपए की मांग की जा रही थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह मांग असहनीय थी।
परिवार की गुहार पर एसएसपी नैनीताल, डॉ. मंजूनाथ टीसी ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने कोतवाली हल्द्वानी के अधिकारियों को निर्देश दिए और पुलिस ने तुरंत अस्पताल पहुंचकर मृतका का शव परिजनों को सौंपा। साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किया गया।
परिवार ने बताया कि ईमरजेंसी वार्ड में सिर्फ दो घंटे के इलाज का बिल 80 हजार रुपए बनाकर थमा दिया गया। मरीज की स्थिति शुरुआती क्षणों से गंभीर थी और वही दो घंटे में उनकी मौत हो गई।
यह घटना केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं है। यह पूरे निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में पैसों और मानवीय संवेदनाओं के टकराव का प्रतीक बन गई है। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि कोई भी अस्पताल मरीजों और उनके परिजनों के साथ बिल के नाम पर मनमानी नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, जो स्वयं चिकित्सक रह चुके हैं, ने मामले की गंभीरता को तुरंत समझते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
पूर्व में इस तरह की कई शिकायतें अखबारों की सुर्खियां बनती रही हैं, लेकिन पुलिस अक्सर इसे अस्पताल और मरीज के बीच विवाद बता कर मामले को टाल देती थी। यह पहली बार है जब जनपद के बड़े अधिकारी ने मामले की गंभीरता पर तत्काल और बड़ा एक्शन लिया।
अस्पताल प्रबंधन की जांच जारी है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी हालत में मरीजों और उनके परिवारों के मानवाधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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