
हल्द्वानी। दिल्ली पब्लिक स्कूल, हल्द्वानी में वार्षिक खेलोत्सव ‘उमंग’ का शुभारंभ उत्साह, ऊर्जा और अनुशासन के साथ भव्य रूप में हुआ। खेल दिवस ने विद्यार्थियों के भीतर खेल भावना, टीमवर्क और आत्मविश्वास के मूल्यों को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल अभिलाषा जोशी द्वारा अग्नि मशाल प्रज्वलन के साथ किया गया। उन्होंने खेलों को साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मबल का माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय के प्रो वाइस चेयरमैन एवं प्रधानाचार्या सुश्री रंजना शाही ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर हिमालयन एजुकेशन सोसायटी के चेयरमैन भूमेश अग्रवाल, श्रीमती रीता अग्रवाल एवं प्रो वाइस चेयरमैन विवेक अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत भव्य मार्च पास्ट ने अनुशासन, एकता और समर्पण का संदेश दिया। प्रधानाचार्या सुश्री रंजना शाही ने विद्यार्थियों को खेल भावना, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और नियमों के पालन की शपथ दिलाई, जिससे पूरे आयोजन को गरिमा और नैतिक मूल्यों की मजबूती मिली। खेल प्रस्तुतियों में कक्षा 3 से 5 के विद्यार्थियों की आकर्षक ड्रिल और कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों की ‘डिविनिटी’ ड्रिल ने दर्शकों का मन मोह लिया। ताइक्वांडो के साहसिक प्रदर्शन, जूनियर योगा प्रस्तुति ‘योग की शक्ति का उद्घाटन’, एनसीसी ड्रिल और सीनियर विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आर्टिस्टिक योगा ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई दी। रिले रेस, घुड़सवारी और हाउस पिरामिड जैसी रोमांचक गतिविधियों ने खेल मैदान में जोश भर दिया। सामूहिक शक्ति और संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला। समापन अवसर पर गंगा सदन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल चैंपियन ट्रॉफी अपने नाम की। गंगा हाउस को बेस्ट मार्च पास्ट और चेनाब हाउस को बेस्ट पिरामिड का खिताब मिला। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा ट्रॉफी, पदक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रो वाइस चेयरमैन ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वहीं प्रधानाचार्या, समन्वयकों और शिक्षकगणों ने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। खेल दिवस का समापन तालियों की गूंज, उत्साह और उमंग के साथ हुआ, जो विद्यार्थियों के जीवन में अनुशासन और उत्कृष्टता के स्थायी संस्कार छोड़ गया।
