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2022-23 से जून 2026 तक विधायकों को मिली 1664 करोड़ की निधि, खर्च हुई 1091.29 करोड़: करीब 34 प्रतिशत राशि अब भी खर्च होना बाकी
आरटीआइ में सामने आया विधायक निधि का आंकड़ा, प्रदीप बत्रा 77 प्रतिशत खर्च के साथ सबसे आगे, धन सिंह रावत 37 और किशोर उपाध्याय 30 प्रतिशत पर

देहरादून/काशीपुर। उत्तराखंड की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने में अब कुछ ही महीने शेष हैं, लेकिन विधायकों को विकास कार्यों के लिए मिली विधायक निधि का बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं हो पाया है। ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 से जून 2026 तक प्रदेश के विधायकों को कुल 1664 करोड़ रुपये की विधायक निधि उपलब्ध हुई। इसमें से करीब 1091.29 करोड़ रुपये यानी लगभग 66 प्रतिशत ही खर्च किए जा सके हैं। करीब 34 प्रतिशत निधि अभी खर्च होना बाकी है।
यह खुलासा काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) द्वारा मांगी गई सूचना से हुआ है। ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय की उपायुक्त (प्रशासन) हेमन्ती गुंजियाल ने पत्रांक 319762 के माध्यम से वर्तमान विधायकों की विधायक निधि से संबंधित विवरण उपलब्ध कराया है।
उपलब्ध आंकड़ों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधायक निधि खर्च करने के मामले में 65.61 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर हैं, जबकि उनसे अधिक निधि खर्च करने वाले मंत्रियों में रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा, सितारगंज विधायक सौरभ बहुगुणा, चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज और राजपुर रोड विधायक खजान दास शामिल हैं।
मंत्रियों में प्रदीप बत्रा 77 प्रतिशत खर्च के साथ सबसे आगे हैं। सौरभ बहुगुणा ने 72 प्रतिशत, सतपाल महाराज ने 68 प्रतिशत और खजान दास ने 66.11 प्रतिशत विधायक निधि खर्च की है। वहीं मुख्यमंत्री धामी ने 65.61 प्रतिशत निधि खर्च की है।
मुख्यमंत्री के बाद मसूरी विधायक गणेश जोशी 65.45 प्रतिशत खर्च के साथ हैं। भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा ने 62 प्रतिशत, सोमेश्वर विधायक रेखा आर्या ने 60 प्रतिशत, नरेंद्रनगर विधायक सुबोध उनियाल ने 57 प्रतिशत और श्रीनगर विधायक धन सिंह रावत ने 37 प्रतिशत विधायक निधि खर्च की है।
सबसे अधिक निधि खर्च करने वालों में प्रदीप बत्रा अव्वल
विधायक निधि खर्च करने के मामले में रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा 77 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर हैं। उनके बाद 76 प्रतिशत खर्च के साथ फुरकान अहमद, रवि बहादुर, सरवत करीम और मदन सिंह बिष्ट शामिल हैं।
75 प्रतिशत खर्च के साथ चंदन राम दास और महेश सिंह जीना अगले स्थान पर हैं। 74 प्रतिशत खर्च करने वालों में उमेश शर्मा, गोपाल सिंह और सुमित हृदयेश शामिल हैं।
73 प्रतिशत निधि खर्च करने वालों में ब्रज भूषण गैरोला, आदेश सिंह (बीएचईएल), अनुपमा रावत, राज कुमार पोरी, मोहन सिंह, डा. मोहन सिंह (लालकुआं) और फकीर राम शामिल हैं। 72 प्रतिशत खर्च के साथ बंशीधर भगत, दीवान सिंह बिष्ट, वीरेंद्र कुमार और सौरभ बहुगुणा का नाम है।
71 प्रतिशत खर्च करने वालों में ममता राकेश और त्रिलोक सिंह चीमा हैं। मदन कौशिक और अरविंद पांडेय ने 70 प्रतिशत निधि खर्च की है। 69 प्रतिशत खर्च करने वालों में विनोद कंडारी, उमेश शर्मा, शहजाद, ऋतु खंडूड़ी, सरिता आर्य, तिलकराज बेहड़ और भुवन चंद्र शामिल हैं। सतपाल महाराज 68 प्रतिशत खर्च के साथ इस सूची में हैं।
वहीं सबसे निचले पायदान पर टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्होंने अब तक 30 प्रतिशत विधायक निधि खर्च की है।
इसके बाद श्रीनगर विधायक डा. धन सिंह रावत 37 प्रतिशत, रेणु बिष्ट 44 प्रतिशत, प्रीतम सिंह 51 प्रतिशत और सुरेश गड़िया 52 प्रतिशत निधि खर्च के साथ हैं। खुशाल सिंह ने 53 प्रतिशत, प्रेमचंद्र अग्रवाल ने 54 प्रतिशत तथा यशपाल आर्य और शक्तिलाल शाह ने 55 प्रतिशत निधि खर्च की है।
प्रमोद नौटियाल ने 56 प्रतिशत विधायक निधि खर्च की है, जबकि शैला रानी, भरत सिंह और सुबोध उनियाल 57 प्रतिशत खर्च के साथ इस निचली सूची में शामिल हैं।
विधायक निधि खर्च के ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल का अंतिम दौर चल रहा है। ऐसे में करीब एक-तिहाई निधि का अब तक खर्च नहीं हो पाना विकास कार्यों की गति और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। विधायक निधि का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आवश्यक विकास कार्यों को गति देना है, इसलिए उपलब्ध धनराशि का समय पर उपयोग होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
आरटीआइ से सामने आए आंकड़े यह भी बताते हैं कि विधायकों के बीच निधि खर्च करने की गति में खासा अंतर है। एक ओर कुछ विधायक 70 प्रतिशत से अधिक निधि खर्च कर चुके हैं, वहीं कुछ विधायकों का खर्च 50 प्रतिशत से भी कम है। इससे विधानसभा क्षेत्रवार विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी अलग-अलग तस्वीर सामने आती है।

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