Advertisement
ख़बर शेयर करें -

हल्द्वानी। कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग में जब किसी कार्यकर्ता को प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी मिलती है, तो उसके पीछे सिर्फ एक नियुक्ति पत्र नहीं होता। उसके पीछे संगठन के साथ बिताए गए वर्षों का अनुभव, लगातार सक्रिय रहने की आदत और बदलते दौर के साथ राजनीति के नए माध्यमों को समझने की क्षमता भी होती है। रोहित भट्ट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की स्वीकृति के बाद उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया विभाग में नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं। अभिनव थापर को प्रदेश अध्यक्ष, भरत शर्मा और हर्षित सिंह बिष्ट को उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं रोहित भट्ट, मधुसूदन सुंदरियाल, दिनेश चंद्र टम्टा और जसवीर कौर को प्रदेश समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नामों में रोहित भट्ट का नाम इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि संगठन के भीतर उनका सफर किसी अचानक मिली जिम्मेदारी से नहीं बना है। मोटाहल्दू से निकलकर कांग्रेस संगठन के अलग-अलग स्तरों पर काम करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया, आईटी, मीडिया और जनसंपर्क के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। रोहित भट्ट लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष, पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्वर्गीय डॉ. इंदिरा हृदयेश के साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया। राजनीति में किसी वरिष्ठ नेता के साथ काम करना सिर्फ कार्यक्रमों में मौजूद रहना नहीं होता। यह संगठन को करीब से देखने, कार्यकर्ताओं को समझने, संवाद कायम करने और राजनीतिक परिस्थितियों को पढ़ने का भी अनुभव देता है। यही अनुभव आगे चलकर रोहित भट्ट के काम में दिखाई देता रहा। वर्तमान में वह हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश के जनसंपर्क अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके साथ ही जिला नैनीताल कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग के प्रभारी के तौर पर भी सक्रिय हैं। यानी एक तरफ जनप्रतिनिधि और जनता के बीच संवाद की जिम्मेदारी, तो दूसरी तरफ पार्टी के डिजिटल संगठन को संभालने का काम। रोहित भट्ट की संगठनात्मक यात्रा यहीं तक सीमित नहीं रही। वह कांग्रेस आईटी सेल के प्रदेश सचिव रह चुके हैं और अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। इसके अलावा इंटक यानी राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस की युवा इकाई में राष्ट्रीय सचिव (मीडिया) के तौर पर भी उन्होंने काम किया। इन जिम्मेदारियों को अगर एक साथ रखकर देखा जाए तो एक बात साफ दिखाई देती है—रोहित भट्ट ने राजनीति के उस हिस्से में लगातार काम किया है, जहां संगठन, मीडिया और जनता के बीच संवाद तैयार होता है। आज के दौर में राजनीतिक संगठन के लिए सोशल मीडिया केवल पोस्ट डालने का माध्यम नहीं रह गया है। किसी मुद्दे को जनता तक पहुंचाना, कार्यकर्ताओं को जोड़ना, पार्टी की बात को सही समय पर सामने रखना और विरोधी नैरेटिव का जवाब देना—ये सब राजनीतिक संचार का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे समय में सोशल मीडिया विभाग में प्रदेश समन्वयक की जिम्मेदारी महज तकनीकी काम नहीं, बल्कि संगठन के डिजिटल संवाद को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी है। रोहित भट्ट के सामने अब यही चुनौती और अवसर दोनों हैं। प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग जिलों और कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना, स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से सामने लाना और संगठन की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाना उनकी नई भूमिका का अहम हिस्सा होगा। किसी भी संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहना आसान नहीं होता। उससे भी मुश्किल होता है हर नई जिम्मेदारी के साथ खुद को प्रासंगिक बनाए रखना। रोहित भट्ट की अब तक की यात्रा को देखें तो उनकी नई जिम्मेदारी इसी निरंतरता का अगला पड़ाव नजर आती है। नियुक्ति के बाद रोहित भट्ट ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व, वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो विश्वास जताया है, उसका पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करेंगे। कांग्रेस की विचारधारा, जनहित से जुड़े मुद्दों और संगठन की आवाज को सोशल मीडिया के माध्यम से मजबूती से जनता तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। रोहित भट्ट की नियुक्ति के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी उत्साह है। बधाई देने वालों का कहना है कि संगठन और सोशल मीडिया के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव का लाभ अब प्रदेश स्तर पर मिलेगा। दरअसल, किसी पद पर पहुंच जाना एक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन उस पद तक पहुंचने के लिए वर्षों तक लगातार काम करते रहना ही किसी कार्यकर्ता की असली पहचान बनाता है। रोहित भट्ट की नई जिम्मेदारी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है एक नई शुरुआत के तौर पर नहीं, बल्कि लंबे संगठनात्मक सफर के अगले अध्याय के रूप में।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में वनीकरण बजट का दुरुपयोग: आईफोन, कूलर और भवनों की सजावट पर खर्च हुए करोड़ों

Advertisement
Ad

Comments

[gs-fb-comments]