
गैरसैंण: उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच बसे गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में आज बजट सत्र का चौथा दिन है। बाहर मार्च की हल्की धूप है, और भीतर लोकतंत्र की गरमाहट। आज का दिन भी सवालों, जवाबों और बहस के नाम रहने वाला है।
दिन की शुरुआत हमेशा की तरह प्रश्नकाल से होगी। यही वह समय होता है जब विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं लेकर सरकार के सामने खड़े होते हैं। कहीं सड़क की मांग, कहीं अस्पताल की हालत, कहीं रोजगार का सवाल। कागज़ पर लिखे सवाल, लेकिन उनके पीछे हजारों लोगों की उम्मीदें।
प्रश्नकाल के बाद सदन का रुख बजट की तरफ मुड़ जाएगा। सरकार जो बजट लेकर आई है, उस पर सामान्य चर्चा होगी। सत्ता पक्ष इसे संतुलित, दूरदर्शी और विकास का रास्ता बताने में लगा होगा। वहीं विपक्ष अपने अंदाज़ में पूछेगा घोषणाएं कितनी हैं और जमीन पर काम कितना होगा?
बहस में सिर्फ आंकड़े नहीं होंगे। बात होगी प्रदेश के विकास की। रोजगार की। स्वास्थ्य सेवाओं की। शिक्षा के हालात की। सड़कों की, जो पहाड़ में जीवनरेखा होती हैं। पर्यटन की, जिससे उम्मीदें जुड़ी हैं। और खेती की, जिससे गांव अब भी सांस लेते हैं।
कई विधायक इस मौके पर अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याएं भी उठाएंगे। सदन के भीतर यह कोशिश होगी कि सरकार का ध्यान उन मुद्दों की तरफ जाए जो अक्सर फाइलों में दबे रह जाते हैं।
बजट पर सामान्य चर्चा के बाद नियम 58 के तहत लिए गए सवालों पर भी चर्चा होगी। यानी सवालों का सिलसिला आज भी थमने वाला नहीं है।
इससे पहले बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सत्र की अवधि बढ़ाने के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हुई तो रविवार को अवकाश रखकर सोमवार को भी चर्चा की जा सकती है। मुख्यमंत्री का कहना था कि विपक्ष की एक-एक बात का जवाब दिया जाएगा। विपक्ष जितनी चर्चा चाहता है, सरकार उतनी चर्चा के लिए तैयार है।
अब देखना यह है कि पहाड़ की इस विधानसभा में आज कितनी आवाज़ें उठती हैं, कितने सवाल गूंजते हैं और जवाब कितने संतोषजनक मिलते हैं। क्योंकि लोकतंत्र में बहस सिर्फ शब्दों का आदान-प्रदान नहीं होती, यह जनता की उम्मीदों का हिसाब भी होती है।
