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देहरादून। अक्सर खबरों में अव्यवस्था आती है जाम की, हादसों की, अफरा-तफरी की। सिस्टम पर सवाल उठते हैं और उठने भी चाहिए। लेकिन कभी-कभी व्यवस्था भी खबर बनती है। शोर के बीच काम की आवाज़ कम सुनाई देती है, पर जब वही काम लाखों लोगों की आस्था और सुरक्षा से जुड़ा हो, तब उसे दर्ज किया जाना चाहिए। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा एक यात्रा नहीं, चलती हुई चुनौती है। पहाड़, मौसम, भीड़, सुरक्षा और अनिश्चितता सब एक साथ। इसी चुनौती के बीच एक नाम उभरता है लोकजीत सिंह। बेहतर प्रबंधन और समन्वय के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉच ग्रुप के स्कोच पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है।
28 मार्च 2026 को नई दिल्ली के भारत आवास केंद्र में आयोजित स्कोच के 106वें समिट में यह सम्मान दिया जाएगा। वर्ष 2024 की चारधाम यात्रा में आई चुनौतियों ने प्रशासन को आईना दिखाया। भीड़ प्रबंधन से लेकर आपात स्थितियों तक, कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस की गई। पुलिस मुख्यालय ने निर्णय लिया कि आईजी रेंज के अधीन एक सशक्त कंट्रोल रूम गठित किया जाए एक ऐसा तंत्र जो केवल प्रतिक्रिया न दे, बल्कि पहले से तैयार रहे। यह जिम्मेदारी लोकजीत सिंह को सौंपी गई। समय कम था, जिम्मेदारी बड़ी। लेकिन अल्प अवधि में कंट्रोल रूम की स्थापना कर टीम के साथ व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी गईं। तकनीक, डेटा, जमीनी समन्वय तीनों को साथ लेकर काम हुआ। सरकार और पुलिस विभाग के सामने 2025 की यात्रा को सुव्यवस्थित और सुरक्षित ढंग से संचालित करना बड़ी चुनौती थी। कंट्रोल रूम ने एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया नए प्रयोग किए, समन्वय तंत्र को मजबूत किया और जवाबदेही तय की। चारधाम यात्रा केवल भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं रहती। पहाड़ों में हर मोड़ पर अनिश्चितता है। धराली आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय, पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती, यात्रा मार्ग में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी, इन संवेदनशील परिस्थितियों में लोकजीत सिंह ने सक्रिय और गतिशील नेतृत्व दिखाया। चुनौती केवल घटनाओं से निपटने की नहीं थी, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की भी थी। पहाड़ पर विश्वास भी सुरक्षा का हिस्सा होता है। अगर भरोसा डगमगाए, तो व्यवस्था कितनी भी मजबूत क्यों न हो, अधूरी लगती है। लोकजीत सिंह को इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा चुका है। वर्ष 2021 में कोविड प्रबंधन के लिए उन्हें फिक्की द्वारा स्मार्ट पुलिसिंग पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा प्रबंधन के लिए राज्यपाल द्वारा उत्कृष्ट सेवा पदक भी प्रदान किया गया। यानी यह सम्मान अचानक नहीं आया। यह लगातार किए गए काम की एक और कड़ी है। अक्सर सिस्टम पर सवाल उठते हैं। और उठने चाहिए। लोकतंत्र सवालों से चलता है। लेकिन जब उसी सिस्टम के भीतर से कुछ लोग बेहतर प्रबंधन और जवाबदेही की मिसाल पेश करते हैं, तो उसे भी दर्ज होना चाहिए। चारधाम यात्रा में लाखों लोगों की आस्था जुड़ी होती है। भीड़, मौसम, भूगोल और सुरक्षा इन सबके बीच संतुलन बनाना आसान नहीं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान केवल एक अधिकारी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस टीम की भी पहचान है, जिसने चुपचाप काम किया। क्योंकि कभी-कभी व्यवस्था भी खबर बनती है। और यह वही खबर है। यहाँ बता दें कि लोकजीत सिंह वर्तमान में देहरादून में पुलिस अधीक्षक यातायात के पद पर कार्यरत हैं।

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