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उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में शुक्रवार, 9 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच की सिफारिश मंजूर कर दी। यह कदम लंबे समय से चली आ रही न्याय और पारदर्शिता की मांग का परिणाम माना जा रहा है। अंकिता के माता-पिता की भावनाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार शुरू से अंत तक निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना चाहती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही महिला आईपीएस के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, एसआईटी ने आरोपियों के खिलाफ गहन जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की, और निचली अदालत ने 30 मई 2025 को रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, उनके दोस्त अंकित गुप्ता और मैनेजर सौरभ भास्कर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऑडियो क्लिप्स के आधार पर अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार किसी भी साक्ष्य की अनदेखी नहीं करेगी। मामला अचानक तब सुर्खियों में आया जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा साझा ऑडियो-वीडियो में कथित वीआईपी का जिक्र हुआ। इसके बाद प्रदेशभर में प्रदर्शन और राजनीतिक घमासान ने गति पकड़ी। 6 जनवरी को मुख्यमंत्री ने प्रेसवार्ता में कहा था कि वह माता-पिता से मुलाकात करेंगे। अगले दिन हुई मुलाकात में माता-पिता ने सीबीआई जांच और वीआईपी के नाम का खुलासा करने की मांग रखी। अंकिता भंडारी पौड़ी जिले के श्रीकोट डोभ गांव की 19 वर्षीय युवती थीं। वह यमकेश्वर ब्लॉक के गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थीं। 18 सितंबर 2022 को वह अचानक लापता हो गईं, और 24 सितंबर को उनका शव चीला बैराज की नहर से बरामद हुआ। इस लंबी लड़ाई और राजनीतिक दबाव के बाद अब सीबीआई जांच से उम्मीद जताई जा रही है कि अंकिता प्रकरण की तह तक जाकर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

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