
हल्द्वानी: जम्मू में शतरंज की बिसात सजी थी। मोहरों की चालें चल रही थीं, लेकिन असल खेल सिर्फ बोर्ड पर नहीं, दिमाग में हो रहा था। तारीख थी 26 से 31 मार्च। जगह थी आईडीपीएस स्कूल। और इसी बिसात पर एक छोटा सा नाम, बड़ी खामोशी से इतिहास लिख रहा था तेजस तिवारी।
120 खिलाड़ी, 9 राज्य, और अनगिनत चालें। हर खिलाड़ी जीत की ओर बढ़ना चाहता था। लेकिन जीत हमेशा सबसे तेज चलने वाले की नहीं होती, जीत अक्सर उस खिलाड़ी की होती है जो सही समय पर सही चाल चल सके। तेजस ने वही किया।
अंडर 11 कैटेगरी। नाम से लगता है कि यह बच्चों का खेल होगा। लेकिन यहां हर चाल में रणनीति थी, हर निर्णय में दबाव था। और इन्हीं दबावों के बीच तेजस तिवारी ने 5.5 पॉइंट बनाकर पहला स्थान हासिल किया।
5.5 पॉइंट यह सिर्फ एक संख्या नहीं है। यह उन घंटों की कहानी है, जो एक बच्चा बोर्ड के सामने बैठकर सोचता है। यह उन हार-जीत के पलों की कहानी है, जहां धैर्य ही सबसे बड़ा हथियार बनता है।
हल्द्वानी शहर का सुभाष नगर एक साधारण सा मोहल्ला। लेकिन यहीं से एक असाधारण कहानी निकल रही है। कक्षा 3 का छात्र, दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाला तेजस, आज सिर्फ एक छात्र नहीं रहा वह एक पहचान बन रहा है।
जुलाई 2023 में तेजस ने विश्व रिकॉर्ड बनाया वो भी सबसे कम उम्र के फिडे रेटेड खिलाड़ी बनने का। उस समय भी सवाल यही था इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी समझ कैसे?
मलेशिया में कॉमनवेल्थ शतरंज खेल। भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए तेजस। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का सफर नहीं, यह उस भरोसे का सफर है जो एक देश अपने उभरते हुए खिलाड़ियों पर करता है। हर टूर्नामेंट, हर जीत एक नई कहानी जोड़ती जा रही है। और तेजस, बिना शोर किए, लगातार आगे बढ़ रहे हैं। आज की खबरों में अक्सर शोर होता है। लेकिन कुछ खबरें ऐसी होती हैं, जो शांति से आती हैं और दिल में जगह बना लेती हैं। तेजस तिवारी की यह जीत भी वैसी ही है। कोई विवाद नहीं, कोई बयान नहीं सिर्फ एक बच्चा, एक बिसात, और कुछ शानदार चालें। शायद यही असली खेल है। जहां जीत बोलती नहीं, दिखती है।
