
‘सम्राट अशोक: चंड से धम्म तक’ की ऐतिहासिक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
हल्द्वानी। जब विजय का अभिमान करुणा के प्रकाश में बदलता है, तब इतिहास केवल गाथा नहीं, बल्कि मानवता का संदेश बन जाता है।
इसी प्रेरणादायी संदेश के साथ दिल्ली पब्लिक स्कूल, हल्द्वानी में 31 अक्टूबर 2026 को वार्षिक उत्सव का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। सम्राट अशोक: चंड से धम्म तक विजय से करुणा तक की एक यात्रा विषय पर आधारित यह समारोह रंग, संगीत, नृत्य और विद्यार्थियों की अद्भुत सृजनात्मक प्रतिभा का अनुपम संगम रहा। विद्यार्थियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से भारतीय इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण अध्याय को जीवंत कर दिया।
समारोह का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट एवं विशिष्ट अतिथि एसएसपी डॉ
मंजूनाथ टी.सी. द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात् प्रस्तुत संगीतमय नाटिका ने दर्शकों को सम्राट अशोक के जीवन के विभिन्न चरणों से परिचित कराया।
नाटिका के प्रथम चरण में सम्राट अशोक के प्रारंभिक जीवन, विशाल सेना, हाथियों एवं घुड़सवारों के साथ युद्धभूमि के दृश्यों तथा साम्राज्य विस्तार की महत्त्वाकांक्षा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। अशोक के पराक्रमी किंतु कठोर चंड स्वरूप का सजीव चित्रण देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे।
प्रस्तुति का भावपूर्ण मोड़ तब आया, जब कलिंग युद्ध के विनाशकारी परिणामों से व्यथित सम्राट अशोक के अंतर्मन में करुणा, पश्चात्ताप और आत्मबोध का भाव जागृत हुआ। युद्ध की विभीषिका और मानवीय पीड़ा के दृश्यों ने सभागार में उपस्थित दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। विद्यार्थियों के सधे हुए अभिनय और भावपूर्ण नृत्य ने इस परिवर्तन को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ मंच पर उकेरा।
नाटिका के अगले चरण में सम्राट अशोक की विजय से करुणा तक की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाया गया। तलवार के स्थान पर शांति, हिंसा के स्थान पर अहिंसा और साम्राज्य विस्तार के स्थान पर मानव कल्याण को महत्त्व देने वाले अशोक के रूपांतरण को विद्यार्थियों ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। साँची के बौद्ध स्तूप, बोधि वृक्ष, अशोक स्तंभ और धर्मचक्र की प्रेरणादायी झलकियों ने मंच को ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक आभा से आलोकित कर दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन और उत्कृष्ट मंचन की प्रशंसा की। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना के लिए महत्त्वपूर्ण बताया तथा उनका उत्साहवर्धन किया।
समारोह के दौरान आकर्षक मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा, मधुर संगीत, उत्कृष्ट प्रकाश संयोजन और विद्यार्थियों की ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रत्येक प्रस्तुति में विद्यार्थियों की मेहनत, सामूहिक समन्वय और कलात्मक कौशल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को सम्राट अशोक के जीवन से प्रेरणा लेते हुए करुणा, शांति, सहिष्णुता और ‘स्व से पहले सेवा’ जैसे जीवन-मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस प्रकार दिल्ली पब्लिक स्कूल, हल्द्वानी का वार्षिक उत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित न रहकर इतिहास, कला और मानवीय मूल्यों का प्रेरणादायी उत्सव बन गया। इसने उपस्थित सभी लोगों के मन में यह संदेश अंकित किया कि सच्ची महानता विजय में नहीं, बल्कि करुणा, शांति और मानवता की सेवा में निहित है।


