
धामी का कांग्रेस पर वार: जीत में आयोग पर भरोसा, हार में सवाल क्यों?
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सियासत अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस न्याय यात्रा के जरिए सरकार को घेर रही है तो भाजपा ने जवाब में ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। सवाल यह है कि लोकतंत्र बचाने के नाम पर शुरू होने वाली इन यात्राओं में जनता के मुद्दे कितनी जगह पाएंगे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप कितना हावी रहेंगे?
गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में धामी ने कांग्रेस के चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जिस चुनाव आयोग के तहत हुए चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली, उसी की कार्यप्रणाली पर हार के बाद सवाल उठाना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के करीब छह दशक के शासन का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी आज जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
धामी के बयान का केंद्रीय तर्क यही रहा कि चुनावी नतीजों के आधार पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति नजरिया नहीं बदलना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों का जवाब केवल राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि तथ्यों और पारदर्शिता से ही मिलता है। लोकतंत्र में संस्थाओं पर भरोसा जरूरी है, लेकिन उनके कामकाज पर सवाल उठाने और उन सवालों का जवाब मांगने की गुंजाइश भी उतनी ही अहम है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की न्याय यात्रा पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि केवल यात्राएं निकालने और नारे लगाने से जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए जनता के बीच जाकर उसकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने पर कांग्रेस अपनी रणनीति की समीक्षा करने के बजाय जनता को ही कटघरे में खड़ा करती है।
लेकिन अब भाजपा भी यात्रा के जरिए जनता के बीच जाने की तैयारी में है। ऐसे में सवाल कांग्रेस की यात्रा की उपयोगिता के साथ भाजपा की जवाबी यात्रा के उद्देश्य पर भी उठता है। यदि यात्राओं का मकसद जनता की आवाज उठाना है तो रोजगार, भर्ती, महंगाई, पलायन और विकास जैसे मुद्दे केंद्र में होने चाहिए। यदि उद्देश्य केवल विरोधी के आरोपों का जवाब देना है तो सड़कों पर राजनीतिक शोर बढ़ेगा, लेकिन जनता के सवाल वहीं रह जाएंगे।
धामी ने बताया कि भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ के तहत 31 अक्टूबर को श्रीनगर और दो नवंबर को देहरादून में पदयात्रा निकाली जाएगी। ऊधम सिंह नगर में भी यात्रा आयोजित की जाएगी, हालांकि उसकी तारीख और विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा नहीं हुई है।
कांग्रेस अपनी न्याय यात्रा से सरकार को घेरने की कोशिश में है, जबकि भाजपा जवाबी यात्रा से विपक्ष के आरोपों को चुनौती देगी। दोनों दलों के लिए यह जनता तक पहुंचने का मौका है, लेकिन असली कसौटी भाषणों की धार नहीं, जनता के सवालों पर उनका जवाब होगा।
2027 की चुनावी लड़ाई अभी दूर है, मगर यात्राओं की राजनीति शुरू हो चुकी है। अब देखना यह है कि इन रास्तों पर जनता की समस्याएं आगे चलेंगी या राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप।


