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पुलिस स्मृति दिवस पर 154 अमर जवानों को नमन, नैनीताल में शहीदों को याद करते हुए नम हुईं आंखें

आशुतोष सरकार
नैनीताल। वर्दी पहनते वक्त उन्होंने कर्तव्य निभाने की शपथ ली थी। शायद यह भी जानते थे कि जिस राह पर वे चल रहे हैं, वहां हर कदम पर खतरा है। लेकिन देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी उनके लिए अपनी जान से भी बढ़कर थी। ड्यूटी निभाते हुए जिन जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए, बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस पर उन्हें याद किया गया। नैनीताल की रिजर्व पुलिस लाइन में श्रद्धांजलि के दौरान पुष्पचक्र सिर्फ स्मारक पर नहीं चढ़े, बल्कि उन अधूरी जिंदगियों, बिछड़े परिवारों और उन सपनों के नाम भी अर्पित हुए, जो देश की सुरक्षा के लिए पीछे छूट गए। पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं निवेदिता कुकरेती और एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया। एक सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच देशभर में कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए 154 पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उत्तराखंड पुलिस के शहीद उपनिरीक्षक विनोद कुमार के बलिदान और साहसिक कार्यों को भी याद किया गया।
सुसज्जित सलामी गारद की शोक सलामी के बीच माहौल गंभीर हो गया। वर्दी में खड़े पुलिसकर्मियों ने अपने उन साथियों को याद किया, जो अब उनके बीच नहीं हैं। पुलिस की नौकरी में जोखिम कोई नई बात नहीं, लेकिन हर शहादत अपने पीछे एक ऐसा खालीपन छोड़ जाती है, जिसे कोई पदक, सम्मान या सरकारी घोषणा पूरी तरह नहीं भर सकती।
शहीदों के नाम पढ़े जाते हैं, उन्हें सलामी दी जाती है और श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। मगर उनके परिवारों के लिए यह यादें किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहतीं। देश के लिए दिया गया बलिदान सार्वजनिक इतिहास का हिस्सा बन जाता है, जबकि अपनों की कमी परिवार की निजी जिंदगी में हमेशा बनी रहती है। पुलिस स्मृति दिवस केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी को दोहराने का दिन भी है, जिसके लिए जवान हर परिस्थिति में डटे रहते हैं। उनकी शहादत याद दिलाती है कि सुरक्षित समाज के पीछे ऐसे लोगों का योगदान है, जिनकी ड्यूटी अक्सर दूसरों की सुरक्षा और सुविधा के लिए होती है।
कार्यक्रम में एसपी नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र, एसपी हल्द्वानी हरबंस सिंह, एसपी संचार रेवाधर मठपाल, सीओ नैनीताल अंजना नेगी, सीओ रामनगर रविकांत सेमवाल, मुख्य अग्निशमन अधिकारी गौरव किरार, प्रतिसार निरीक्षक हरकेश सिंह सहित विभिन्न थानों, चौकियों और शाखाओं के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। शहीद स्मारक पर अर्पित पुष्प कुछ समय बाद मुरझा जाएंगे, लेकिन देश की रक्षा में प्राण देने वालों का योगदान नहीं। उनकी याद के साथ एक सवाल भी हमेशा बना रहेगा जो जवान देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व दे गए, क्या हम उनके बलिदान के अनुरूप अपने कर्तव्यों के प्रति उतने ही ईमानदार हैं?

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