
जड़ों की कटाई पर उठे बड़े सवाल, मुख्यालय के आदेशों के बावजूद दोबारा शुरू होने का दावा
रामनगर। उत्तराखण्ड वन विकास निगम के रामनगर विक्रय प्रभाग डिपो में नियमों के विपरीत कार्य होने के आरोप एक बार फिर सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मुख्यालय के आदेशों के बाद कुछ समय तक व्यवस्था में सुधार दिखाई दिया, लेकिन करीब एक माह बाद कथित मौखिक निर्देशों के आधार पर जड़ों की शिराओं का कटान दोबारा शुरू कर दिया गया।
आरोप है कि डिपो परिसर में ही आरा मशीन और कुल्हाड़ी के माध्यम से जड़ों की कटाई कराई जा रही है, जबकि विभागीय नियमों के अनुसार डिपो के अंदर इस प्रकार की प्रक्रिया प्रतिबंधित है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियमों की अनदेखी की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।
बताया जाता है कि इससे पहले भी रामनगर विक्रय प्रभाग में चल रही कार्यप्रणाली को लेकर उत्तराखण्ड वन विकास निगम मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया था। प्रधान कार्यालय देहरादून की ओर से पूर्व में जारी आदेशों के उल्लंघन के मामले में क्षेत्रीय प्रबंधक रामनगर से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की गई थी। यह कार्रवाई उत्तराखण्ड वन विकास निगम कर्मचारी संघ की ओर से भेजी गई शिकायत के आधार पर की गई थी। शिकायत के बाद कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण और नई तैनातियों के बाद कुछ समय तक व्यवस्थाएं सामान्य रहने का दावा किया गया, लेकिन अब फिर से पुराने हालात लौटने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने विवाद को और बढ़ा दिया है। इनमें कथित तौर पर ठेकेदारों द्वारा पेट्रोल से चलने वाली बड़ी आरा मशीनों से जड़ों का कटान करते हुए दिखाया गया है।
विभागीय जानकारों का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेकेदारों को जड़ों को अपने वाहनों के माध्यम से उठाना होता है। डिपो परिसर में ही जड़ों की कटाई किए जाने की स्थिति में नियमों के उल्लंघन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि इस प्रकार के कार्यों के लिए कुछ कर्मचारियों द्वारा ठेकेदारों से प्रति घनमीटर 40 से 50 रुपये तक की वसूली किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। कर्मचारी संघ की शिकायत में केवल जड़ों की कटाई का मामला ही नहीं उठाया गया है, बल्कि डिपो ग्रेडिंग, चट्टाबंदी और हाईड्रा मशीनों से कराए जा रहे कार्यों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रामनगर समेत कुछ अन्य प्रभागों में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए ऐसे कार्य कराए जा रहे हैं, जो विभागीय नियमों के विपरीत हैं। शिकायतकर्ताओं ने इसे निगम के हितों के खिलाफ बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार अधिकांश डिपुओं में जड़ों की लोडिंग, अनलोडिंग और ग्रेडिंग का कार्य हाईड्रा मशीनों के माध्यम से कराया जा रहा है, लेकिन भुगतान के लिए मजदूरों के नाम से बिल बनाए जाने की बात भी सामने आ रही है। आरोप है कि ठेकेदारों और कुछ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
नियमों के अनुसार डिपो परिसर में जड़ों की कटाई और मुछान की अनुमति नहीं है। ऐसे में यदि डिपो के अंदर यह गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो यह विभागीय आदेशों की अनदेखी का गंभीर मामला माना जा सकता है।
मामले में जब क्षेत्रीय प्रबंधक रामनगर मयंक शेखर झा से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रभागीय विक्रय प्रबंधक रामनगर मुदित आर्य से बात की जाए। उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें एक बैठक में जाना है।
इसके बाद प्रभागीय विक्रय प्रबंधक रामनगर मुदित आर्य से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
अब जांच पर टिकी निगाहें रामनगर विक्रय प्रभाग में उठे इन सवालों के बाद अब सभी की निगाहें विभागीय जांच और अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल विभागीय नियमों की अनदेखी का मामला होगा, बल्कि निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
