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नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी ने बढ़ाया सियासी संदेश

देहरादून। चुनाव से पहले सियासत में चेहरे नहीं, उनके आने-जाने के मायने अहम होते हैं। उत्तराखंड में 2027 की जंग से पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी ऐसा ही एक सियासी मौका साधा है। भाजपा में घुटन और सम्मान की कमी का हवाला देकर रामशरण नौटियाल कांग्रेस में लौट आए हैं। उनकी वापसी ने कांग्रेस को भाजपा के भीतर असंतोष पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है। संदेश साफ है जो भाजपा में खुद को असहज महसूस कर रहे हैं, कांग्रेस उनके लिए फिर सियासी ठिकाना बन सकती है। दिल्ली में रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में ज्वाइनिंग के दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की मौजूदगी भी राजनीतिक संदेश दे गई। कांग्रेस इसे महज एक नेता की वापसी नहीं, बल्कि 2027 से पहले अपने कुनबे को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा का यह कहना कि नौटियाल भाजपा में घुटन महसूस कर रहे थे, इस पूरे घटनाक्रम को और धार दे गया।
गौरतलब हैं कि रामशरण नौटियाल अप्रैल 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे। भाजपा ने 2022 में उन्हें चकराता से टिकट दिया, लेकिन कांग्रेस के प्रीतम सिंह के सामने उन्हें 9,436 मतों से हार का सामना करना पड़ा। अब करीब 12 साल बाद उनकी कांग्रेस में वापसी ने भाजपा की संगठनात्मक कार्यशैली और नेताओं को मिलने वाले सम्मान पर सवाल खड़े करने का अवसर दिया है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के लिए यह भाजपा को उसके ही पूर्व नेता की शिकायतों के जरिए घेरने का मौका है। विपक्ष की राजनीति में ऐसे घटनाक्रम तभी असरदार होते हैं, जब उन्हें महज बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय संगठन की मजबूती से जोड़ा जाए। आर्य और कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब इसी राजनीतिक अवसर को जमीन पर उतारने की चुनौती है।
वापसी से कितना बदलेगा चकराता का गणित?
देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके नौटियाल की क्षेत्रीय राजनीति में पुरानी पहचान है। उनकी वापसी से चकराता और जौनसार-बावर में कांग्रेस के समीकरणों पर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि, प्रीतम सिंह की मजबूत पकड़ के बीच नौटियाल की भूमिका क्या होगी और पार्टी उन्हें 2027 में कौन-सी जिम्मेदारी देगी, इस पर अभी तस्वीर साफ नहीं है।
फिलहाल इस घटनाक्रम में कांग्रेस के हाथ एक राजनीतिक मुद्दा जरूर लगा है। भाजपा में सम्मान की कमी की शिकायत करने वाले रामशरण नौटियाल की वापसी ने यशपाल आर्य को सत्तारूढ़ दल पर सवाल उठाने का नया आधार दिया है। अब आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस इस संदेश को कितना प्रभावी बना पाती है, यही 2027 की सियासी लड़ाई में इसकी असली परीक्षा होगी।

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