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योगेश पांडेय
हल्द्वानी: आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व है, और हल्द्वानी के विभिन्न शिवालयों में भक्त भगवान भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर रहे हैं। मंदिरों में ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, और इस दिन को महाशिवरात्रि के रूप में पूजा जाता है।

महाशिवरात्रि का महत्व

हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित बेलबाबा मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित पूरन चंद्र जोशी के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव, माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवलिंग के रूप में उन्हें प्राप्त हुए थे। इसी दिन उन्होंने माता पार्वती को अपने पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

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पंडित जोशी ने बताया कि महाशिवरात्रि का महत्व विशेष रूप से फाल्गुन माह में होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का उत्सव मनाया जाता है, और इसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

चार पहर की पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि के दिन भक्त चार पहर की पूजा करते हैं। इस पूजा में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक विभिन्न सामग्री से किया जाता है, जो सामान्य रुद्राभिषेक में प्रयुक्त होती हैं, लेकिन महाशिवरात्रि पर यह सामग्री पांच गुना अधिक होती है। भगवान भोलेनाथ के 1008 नामों का पाठ किया जाता है, और पूजा के दौरान भगवान का अभिषेक दूध, दही, शहद और गन्ने के रस से किया जाता है।

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मंदिरों में भक्तों की भीड़

महा शिवरात्रि के अवसर पर बेलबाबा मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी थीं। मंदिर समिति के विजय बिष्ट, चंद्रशे बिष्ट, राजेन्द्र बिष्ट सहित अन्य लोग व्यवस्थाओं को संभाल रहे थे, ताकि भक्तों को दर्शन और पूजा में कोई असुविधा न हो।

भोलेनाथ के प्रिय पदार्थों से पूजा

भगवान भोलेनाथ को भांग, धतूरा और बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं, और इनका उपयोग महाशिवरात्रि की पूजा में किया जाता है। पूजा के दौरान भक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए इन विशेष वस्तुओं का अभिषेक करते हैं।

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