

देहरादून: उत्तराखंड में भाजपा कार्यकर्ता लंबे समय से दायित्व की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन धामी सरकार फिलहाल नए दायित्वों की घोषणा के मूड में नहीं दिख रही है। हाल ही में धामी सरकार ने दो महत्वपूर्ण आयोगों के अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ा दिया है। ये आयोग हैं उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य महिला आयोग।
गौरतलब है कि दोनों आयोगों के अध्यक्षों का कार्यकाल जनवरी 2025 में समाप्त हो चुका था, लेकिन नए अध्यक्षों की नियुक्ति में देरी को देखते हुए इन पदों पर कार्यकाल बढ़ाया गया है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल को नए अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
भले ही भाजपा संगठन ने कार्यकर्ताओं को दायित्व देने की बात की हो, लेकिन राज्य सरकार का यह कदम यह संकेत देता है कि फिलहाल पार्टी नए दायित्वों को लेकर कोई बड़ा निर्णय लेने के मूड में नहीं है।





